मुकेश सहनी के लिए खुला NDA का दरवाजा! मल्लाह’ की हुई BJP नेता से मुलाकात.

City Post Live

 

सिटी पोस्ट लाइव :एनडीए का कुनबा बढनेवाला है.मुकेश सहनी बीजेपी  प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की मुलाकात  को लेकर हलचल बढ़ गई है.मुकेश सहनी से मुलाक़ात के बाद  बीजेपी के तरफ से एक बयान में कहा गया कि अगर महागठबंधन में सहनी की स्थिति मजबूत नहीं होती है, तो वे एनडीए में लौट सकते हैं. प्रदेश अध्यक्ष जायसवाल ने कहा, “मुकेश सहनी अपना राजनीतिक कद बढ़ाने के लिए महागठबंधन में गए हैं. अगर वहां उनका कद नहीं बढ़ा, तो वे इधर आ सकते हैं. ” इस बयान ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है.

डॉ. जायसवाल ने यह भी माना कि सहनी का वोट बैंक चुनाव में निर्णायक हो सकता है. जब उनसे मीडियाकर्मियों ने पूछा कि क्या सहनी को एनडीए में बुलाने की कोई पहल की गई है, तो उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “कद नहीं बढ़ा तो वे खुद आ जाएंगे.”सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि महागठबंधन में सहनी की मांगों पर सहमति नहीं बन पा रही है. ऐसे में अगर उन्हें कम सीटें मिलती हैं या सम्मानजनक भागीदारी नहीं दी जाती, तो उनकी ‘घर वापसी’ तय मानी जा रही है.

पुश नोटिफिकेशन के लिए सब्सक्राइब करें।

बिहार की राजनीति में गठबंधन की गणित फिर एक दिलचस्प मोड़ पर है. महागठबंधन में विधानसभा सीटों की हिस्सेदारी को लेकर असहमत नजर आ रहे विकासशील इंसान पार्टी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी को एक बार फिर से पुराने साथी याद आने लगे हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अब खुलकर उन्हें एनडीए में लौटने का इशारा दे दिया है.डॉ. जायसवाल ने यह भी माना कि सहनी का वोट बैंक चुनाव में निर्णायक हो सकता है. जब उनसे मीडियाकर्मियों ने पूछा कि क्या सहनी को एनडीए में बुलाने की कोई पहल की गई है, तो उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “कद नहीं बढ़ा तो वे खुद आ जाएंगे.”सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि महागठबंधन में सहनी की मांगों पर सहमति नहीं बन पा रही है. ऐसे में अगर उन्हें कम सीटें मिलती हैं या सम्मानजनक भागीदारी नहीं दी जाती, तो उनकी ‘घर वापसी’ तय मानी जा रही है.

गौरतलब है कि 2020 के विधानसभा चुनावों में सहनी महागठबंधन से दूरी बनाकर एनडीए में आए थे. उन्हें 11 सीटें मिली थीं और चार विधायक भी बने. लेकिन बाद में तनातनी बढ़ी और सभी विधायक भाजपा में चले गए. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजनीति का यह चक्र फिर एक बार पूरा होता है?गौरतलब है कि 2020 के विधानसभा चुनावों में सहनी महागठबंधन से दूरी बनाकर एनडीए में आए थे. उन्हें 11 सीटें मिली थीं और चार विधायक भी बने. लेकिन बाद में तनातनी बढ़ी और सभी विधायक भाजपा में चले गए. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजनीति का यह चक्र फिर एक बार पूरा होता है?

Share This Article