सिटी पोस्ट लाइव : लम्बे समय से परिसीमन नहीं होने से सबसे ज्यादा नुकशान हिंदी बेल्ट को हुआ है. दक्षिण में 10 लाख पर एक लोकसभा क्षेत्र होता है.इस हिसाब से अगर परिसीमन समय पर होता तो बिहार में लगभग 60 लोकसभा सीटें होतीं. इससे बिहार को एमपी लैंड का फंड भी ज्यादा मिलता और लोकसभा में बिहार का दबदबा होता.बिहार में एक एक लोक सभा क्षेत्र में 30 लाख वोटर हैं. राष्ट्रीय लोक मोर्चा के सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा की मांग है कि परिसीमन जनसँख्या के आधार पर हो.इनकी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) बिहार में एक नया आंदोलन शुरू करने जा रही है.
लोकसभा क्षेत्रों के निर्धारण में वोटरों की संख्या को आधार बनाने की मांग को लेकर यह आन्दोलन होगा.कुशवाहा का कहना है कि अभी लोकसभा क्षेत्र का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर होता है. उनका मानना है कि इससे बिहार को नुकसान हो रहा है. वे चाहते हैं कि 2026 में होने वाले परिसीमन में वोटरों की संख्या को ध्यान में रखा जाए. अभी लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण 1971 में तय किया गया था. 1976 में परिसीमन होना था, लेकिन इसे 20 साल के लिए बढ़ा दिया गया. अब 2026 में लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण होना है.उपेन्द्र कुशवाहा चाहते हैं कि इस बार वोटरों की संख्या को आधार बनाया जाए.
आरएलएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा पहले भी कॉलेजियम के खिलाफ ‘हल्ला बोल, दरवाजा खोल’ आंदोलन कर चुके हैं. अब वे परिसीमन के मुद्दे को लेकर मैदान में उतरेंगे..उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व में पार्टी मई महीने से ही आंदोलन शुरू करेगी. आंदोलन का नारा होगा ‘संवैधानिक आधार, परिसीमन सुधार’, यानी संविधान के अनुसार परिसीमन में सुधार किया जाए. इसकी शुरुआत शाहाबाद के बिक्रमगंज से 8 मई को होगी. इसके बाद 8 जून को मुजफ्फरपुर में आंदोलन होगा.
पार्टी की योजना है कि अंग, मगध और मिथिलांचल में भी जून-जुलाई में आंदोलन किया जाए.उपेन्द्र कुशवाहा इस आंदोलन की शुरुवात तो बिहार से कर रहे हैं लेकिन उन्हें उम्मीद है कि इसका असर पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान में भी होगा.माना जा रहा है कि आएलएम का यह आंदोलन बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर लोगों को कितना जागरूक कर पाती है और सरकार पर कितना दबाव बना पाती है.