सिटी पोस्ट लाइव : बिहार के मुजफ्फरपुर में 9 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म चाकू से प्रहार व इलाज में लापरवाही के मामले के राजनीतिक तूल पकड़ने के बाद सरकार ने कारवाई शुरू कर दी है. मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय सह अस्पताल की अधीक्षक डा. कुमारी विभा को प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. पटना के पीएमसीएच में अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रभारी उपाधीक्षक को तत्काल प्रभाव से पद से मुक्त कर दिया गया है.
स्वास्थ्य विभाग के तीनों डायरेक्टर इन चीफ की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की गई है. इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद अलग से आरोपपत्र गठित कर उपरोक्त दोनों पदाधिकारियों व अन्य दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी. विभाग से जारी अधिसूचना के अनुसार एक जून को नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की मृत्यु मामले में एसकेएमसीएच की अधीक्षक ने रेफरल पालिसी व अपने अन्य कर्तव्यों का निर्वहन सही तरीके से नहीं किया. साथ ही पीड़िता के इलाज में घोर संवेदनहीनता बरती गई.
उस समय पीएमसीएच के अधीक्षक का पद संभाल रहे प्रभारी उपाधीक्षक को प्रथमदृष्टया अपने कर्त व्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करने व प्रशासनिक विफलता का दोषी करार देते हुए तत्काल प्रभाव वे प्रभारी उपाधीक्षक पद से मुक्त कर दिया गया है.स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने पटना डेंटल कालेज में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि वे सोमवार को पटना लौटे हैं. लगातार मामले पर नजर थी. आते ही वरिष्ठ पदाधिकारियों से बात कर स्वास्थ्य विभाग के शीर्षस्थ पदाधिकारियों तीनों डायरेक्टर इन चीफ डा. आरएन चौधरी, डा. वीके सिंह व डा. प्रमोद कुमार के नेतृत्व में जांच टीम गठित कर पीएमसीएच-एसकेएमसीएच जाकर हर पहलू की जांच करने का आदेश दिया गया है.
मुजफ्फरपुर में दुष्कर्म व चाकू के कई प्रहार के बाद जीवन के लिए मौत से संघर्ष कर रही नाबालिग बच्ची की गत रविवार को पीएमसीएच में मौत हो गई थी. नाबालिग के साथ 26 मई को मुजफ्फरपुर स्थित उसके गांव में दुष्कर्म किया गया था. इसके बाद शनिवार को गंभीर हालत में पीएमसीएच लाई गई थी, जहां इलाज में देरी से मौत का स्वजन ने आरोप लगाया था.