Opinion: बिहार में चालू हुई नीतीश कुमार की चुनावी चाल! , आगे-आगे देखिए होता है क्या
सिटी पोस्ट लाइव : महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने जब महिलाओं के लिए प्रति माह 2500 रुपये की सहायता, सामाजिक सुरक्षा पेंशन की रकम बढ़ा कर 1500 करने और 200 यूनिट फ्री बिजली के वादे किए तो लोग इसे उनका मास्टर स्ट्रोक मान रहे थे. नापसंदगी के बावजूद तेजस्वी की इन घोषणाओं की लोग चर्चा करने लगे थे. तब नीतीश कुमार ने कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई. इसे कुछ लोग नीतीश कुमार पर तेजस्वी के बड़े वार के रूप में देख रहे थे. पर, नीतीश ने जिस तरह अब अपने पत्ते खोलने शुरू किए हैं, उससे विपक्ष हतप्रभ है.
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर लगातार सीएम नीतीश कुमार की उम्र और सेहत को लेकर सवाल उठाया रहे हैं. उनके अनुसार नीतीश कुमार बूढ़े हो गए हैं. अचेतावस्था में हैं.लेकिन चुनाव से ठीक पहले नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक चालों से यह साबित कर दिया है कि बुढ़ापे में भी वे सब पर भारी हैं. उनके राजनीतिक फैसले और प्रशासनिक निर्णय, विपक्ष पर अब भी भारी हैं.
नीतीश कुमार की एक चाल ने ही संपूर्ण विपक्ष को झटके में धराशायी कर दिया है.सामाजिक सुरक्षा के तहत नीतीश कुमार ने विधवा, दिव्यांग और वृद्ध पुरुष-महिलाओं को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि झटके में तकरीबन तिगुनी कर दी. पहले यह राशि प्रति माह 400 रुपये थी. अब इसे बढ़ाकर राज्य सरकार ने 1100 कर दिया है. नीतीश कुमार ने न सिर्फ सामाजिक सुरक्षा के तहत मिलने वाली पेंशन की राशि बढ़ाई है, बल्कि जीविका दीदियों के मानदेय को दोगुना करने की घोषणा कर दी है. बिहार में जीविका परियोजना से जुड़ी महिलाओं को पहले 3 लाख स अधिक की कर्ज राशि पर 10 प्रतिशत ब्याज देना पड़ता था. नीतीश कुमार की सरकार ने अब ब्याज घटा कर 7 प्रतिशत कर दिया है. यानी जीविका से जुड़ी तकरीबन 1.5 करोड़ महिलाओं को सीधे ब्याज में 3 प्रतिशत की छूट मिलेगी.
बिहार सरकार ने जब जाति सर्वेक्षण कराया, उसमें आर्थिक सर्वे को भी शामिल किया गया था. यह बात सामने निकल कर आई कि 94 लाख परिवार अब भी आर्थिक रूप से विपन्न हैं. राज्य सरकार ने इसके लिए एक 5 वर्षीय योजना बनाई, जिसमें प्रति परिवार 2 लाख रुपये की सरकारी मदद देने का प्रावाधान था. राज्य सरकार ने इस पर अमल भी शुरू कर दिया था. अब इस योजना के तहत 94 लाख परिवारों को राज्य सरकार एक बार में 2 लाख की मदद देगी.
नीतीश कुमार ने जब से सीएम की कुर्सी संभाली, उनकी प्राथमिकता में आधी आबादी रही है. सीएम बनने के साल भर बाद 2006 में नीतीश सरकार ने महिलाओं को पंचायों में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया. उसके अगले ही साल 2007 में उन्होंने महिलाओं को आरक्षण का प्रावधान निकाय चुनावों में भी कर दिया. सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण मिलने से पुलिस और दूसरे महकमों में महिलाओं की बड़ी संख्या में नियुक्तियां होती रही हैं. नीतीश कुमार के इन कदमों का राजनीतिक लाभ एनडीए को मिलता रहा है.
तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर कह रहे कि उनकी घोषणाओं के दबाव में नीतीश सरकार ने यह फैसला लिया है. तेजस्वी के कहने का अंदाज ठीक वैसा ही है, जैसा जाति गणना कराने की केंद्र की घोषणा पर काग्रेस नेता रहुल गांधी का रहा है. राहुल कहते नहीं थकते कि उनके दबाव में जाति गणना कराने का केंद्र ने फैसला लिया.