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राजधानी पटना के अति-सुरक्षित माने जाने वाले पारस हॉस्पिटल में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी की घटना के बाद, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है और इसके पीछे का मुख्य कारण पुलिस प्रशासन का शराब और बालू माफिया से उगाही और घूसखोरी में व्यस्त रहना है।
प्रशांत किशोर ने गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “जितने मंत्री हैं, जितने सरकार के लोग हैं, वे ट्रांसफर-पोस्टिंग में करोड़ों रुपये की उगाही कर रहे हैं। तो जब पुलिस वाले शराब और बालू माफिया से रुपया उगाही में लगे हैं, तो कानून व्यवस्था का काम कब करेंगे?” उनके इस बयान ने सीधे तौर पर बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन के भ्रष्टाचार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का इकबाल खत्म हो गया है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री के तौर पर काम नहीं कर रहे हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि, “उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति अभी ठीक नहीं है। यह बात मैं पिछले कई महीनों से कह रहा हूं। सरकार का मुखिया ही अगर अचेत अवस्था में रहेगा तो निश्चित तौर पर ऐसी स्थिति होगी।” उन्होंने चेतावनी दी कि बिहार में यह स्थिति और भी भयावह होने वाली है।
प्रशांत किशोर के इस बयान से साफ है कि वे बिहार में बढ़ते अपराधों के लिए सीधे तौर पर सत्ता के गलियारों में फैले भ्रष्टाचार और मुख्यमंत्री की कमजोर नेतृत्व क्षमता को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पारस हॉस्पिटल जैसी जगह पर, जो कि बिहार पुलिस मुख्यालय और मुख्यमंत्री आवास के बेहद करीब है, इस तरह की घटना का होना इस बात की पुष्टि करता है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और उन्हें किसी का खौफ नहीं।
उनके बयान ने एक बार फिर बिहार में सुशासन के दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आम जनता के बीच असुरक्षा का माहौल बढ़ता जा रहा है, और सरकार के मुखिया व प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। प्रशांत किशोर की टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और आने वाले समय में इस पर और अधिक बहस देखने को मिल सकती है।