बीजेपी कोषाध्यक्ष राकेश तिवारी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट: 36 लाख की ठगी और फर्जी NOC मामले में गिरफ्तारी के आदेश…

Ritu Raj

पटना की एक अदालत ने बिहार भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी के खिलाफ धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले में गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है। यह मामला लगभग 36 लाख रुपये की ठगी से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने पटना नगर निगम की फर्जी एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) का इस्तेमाल करके एक विज्ञापन कंपनी से पैसे वसूले।

शिकायतकर्ता कंपनी ‘अस्तित्व एडवरटाइजिंग’ के अनुसार, राकेश तिवारी ने सीसीटीवी इंस्टॉलेशन और विज्ञापन डिस्प्ले के नाम पर यह राशि ली, लेकिन बाद में एनओसी फर्जी साबित हुई। जब कंपनी ने पैसे वापस मांगे, तो टालमटोल किया गया, जिसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा। परिवाद संख्या 14786(सी)/2024 के तहत यह केस दर्ज है। अदालत ने पहले उन्हें 21 दिसंबर 2025 तक पेश होने का निर्देश दिया था, लेकिन अनुपस्थिति के कारण 11 दिसंबर 2025 को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी-5 की अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 356(2) के तहत गैर-जमानती वारंट जारी किया। पाटलिपुत्र थाना पुलिस को आदेश दिया गया है कि तिवारी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को निर्धारित है।

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यह मामला केवल वित्तीय ठगी तक सीमित नहीं लगता। राकेश कुमार तिवारी बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं, और उन पर क्रिकेट प्रशासन से जुड़े अन्य आरोप भी लगे हैं। बिहार पुलिस की विशेष जांच समिति ने दो आपराधिक मामलों (कोतवाली थाना कांड संख्या 49/2023 और अन्य) में पूर्व जांच को त्रुटिपूर्ण बताते हुए पुन: जांच की सिफारिश की है। इनमें दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों को फर्जी डोमिसाइल और जन्म प्रमाणपत्र देकर बिहार टीम में शामिल करने के आरोप हैं। रिपोर्ट जनवरी 2026 में सौंपी गई थी। गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में एक अन्य समान धोखाधड़ी मामले (36 लाख रुपये की ठगी) में उन्हें अग्रिम जमानत मिली थी, जहां अदालत के बाहर समझौता हो गया था। राजनीतिक और क्रिकेट दोनों क्षेत्रों में उनकी प्रभावशाली स्थिति के चलते जांच और गिरफ्तारी प्रक्रिया में चुनौतियां आ सकती हैं, जैसा कि पुलिस सूत्रों ने संकेत दिया है। उनका बेटा हर्षवर्धन अब BCA का अध्यक्ष है।

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