बिहार में नई बिजली दरों के लागू होते ही विपक्ष ने नीतीश-भाजपा गठबंधन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और वीआईपी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे ‘जनता के साथ विश्वासघात’ करार दिया है।

विपक्षी नेताओं का मुख्य आरोप यह है कि चुनाव के दौरान 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का जो सब्जबाग दिखाया गया था, वह महज एक चुनावी स्टंट साबित हुआ। तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा- “सरकार अपने चार महीने के कार्यकाल में ही असली रंग दिखाने लगी है। स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि ‘चीटर मीटर’ के जरिए जनता की जेब काटी जा रही है।” तेजस्वी यादव ने सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए सरकारी खजाने को पानी की तरह बहाया गया। अब उस घाटे की भरपाई अगले पांच सालों तक आम जनता से महंगी बिजली और टैक्स वसूल कर की जाएगी। उन्होंने आशंका जताई कि बचा हुआ पैसा भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा।
नई समय-आधारित दरें (Time of Day Tariff);
| समय अवधि | श्रेणी | दर (प्रति यूनिट) |
| शाम से रात 11 बजे तक (6 घंटे) | पीक आवर | ₹8.10 |
| रात 11 से सुबह 9 बजे तक (10 घंटे) | ऑफ-पीक | ₹7.10 |
| अन्य समय (8 घंटे) | सामान्य | ₹5.94 |
महंगाई की दोहरी मार;
मुकेश सहनी ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यह समय जनता को राहत देने का था, न कि उन पर बोझ डालने का। टैक्स कम करने की बजाय सरकार ने बिजली महंगी कर दी। मार्च में ही पारा चढ़ने लगा है और कटौती शुरू हो गई है। ऐसे में बढ़ी हुई दरें अन्यायपूर्ण हैं। पहले से ही गैस की कीमतों से परेशान जनता के लिए महंगी बिजली ‘कोढ़ में खाज’ के समान है।