TRE-4 Update: चुनाव खत्म, वादे गायब! 46 हजार शिक्षकों की भर्ती पर क्यों चुप है बिहार सरकार?…

Ritu Raj

बिहार में बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 को लेकर अभ्यर्थियों की चिंता और निराशा लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे लाखों उम्मीदवार अब धीरे-धीरे इस बहाली की उम्मीद छोड़ने लगे हैं। सड़कों पर प्रदर्शन और आंदोलन तेज हो रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया या ठोस कदम सामने नहीं आया है।

करीब 10 लाख बीएड और डीएलएड प्रशिक्षित अभ्यर्थी इस भर्ती का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। राज्य सरकार ने लगभग 46,500 पदों पर शिक्षकों की बहाली की घोषणा तो कर दी थी, लेकिन परीक्षा की तिथि को लेकर लगातार हो रही देरी ने पूरे मामले को उलझा दिया है। बीपीएससी के आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार यह परीक्षा अगस्त 2024 में आयोजित होनी थी, लेकिन निर्धारित समय पर यह संभव नहीं हो सका। इसके बाद सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले, अक्टूबर में परीक्षा कराने का संकेत दिया था, लेकिन आचार संहिता लागू होने से पहले भी कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई। चुनाव समाप्त होने के बाद फिर से परीक्षा आयोजित करने की बात कही गई, परंतु अब चुनाव के बाद भी चार महीने से अधिक समय बीत चुका है और अभी तक न तो वैकेंसी जारी हुई है और न ही परीक्षा की कोई निश्चित तिथि घोषित की गई है। राज्य के सुनील कुमार (शिक्षा मंत्री) विभिन्न कार्यक्रमों और सार्वजनिक मंचों पर बार-बार “अगले महीने” वैकेंसी आने की बात करते रहे हैं, लेकिन यह आश्वासन अब तक वास्तविकता में नहीं बदल पाया है। इससे अभ्यर्थियों के बीच असमंजस और असंतोष दोनों बढ़ते जा रहे हैं।

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टीआरई-4 की प्रतीक्षा सिर्फ बीएड या डीएलएड अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि एसटीईटी पास कर चुके अभ्यर्थी, सीटीईटी उत्तीर्ण उम्मीदवार, और वे छात्र भी जो पिछली भर्तियों में सफल नहीं हो पाए थे,सभी इस अवसर का इंतजार कर रहे हैं। खासकर वे अभ्यर्थी जो दो बार एसटीईटी पास कर चुके हैं, उनके लिए यह भर्ती बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता दिलीप कुमार का कहना है कि लंबे समय से प्रदर्शन और मांग के बावजूद सरकार की ओर से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। न तो कोई स्पष्ट तिथि घोषित की जा रही है और न ही कोई आधिकारिक सूचना जारी हो रही है। इससे अभ्यर्थियों में भारी निराशा का माहौल है। हालांकि, अभ्यर्थी अपनी तैयारी जारी रखे हुए हैं, लेकिन अनिश्चितता के कारण वे मानसिक दबाव में भी हैं। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि परीक्षा कब होगी, या फिर होगी भी या नहीं। इस स्थिति ने लाखों युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है, जिससे उनके बीच चिंता और आक्रोश दोनों साफ तौर पर देखा जा सकता है।

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