सिटी पोस्ट लाइव :भाकपा-माले की राज्य कमेटी की दो दिवसीय बैठक में आगामी बिहार विधानसभा चुनाव की रणनीति, संगठनात्मक मजबूती, जन आंदोलन की दिशा और बीजेपी-जेडीयू सरकार के खिलाफ विपक्षी एकजुटता पर चर्चा हो रही है. राज्य सचिव कुणाल ने राजनीतिक हालातों की समीक्षा करते हुए कहा कि बिहार की जनता अब वर्तमान जनविरोधी सरकार से मुक्ति चाहती है. उन्होंने कहा कि राज्य में महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है और अब चुनावी मोर्चे पर साझा रूप से उतरने के लिए तैयार है.
कुनाल ने कहा कि महागठबंधन की समन्वय समिति का गठन हो चुका है और तेजस्वी यादव को इसका अध्यक्ष चुना गया है. कुणाल ने कहा कि हम जनता की बुनियादी सवाल रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और भ्रष्टाचार को लेकर सड़क पर हम संघर्ष तेज करेंगे.बीजेपी बिहार में सांप्रदायिक उन्माद फैलाकर चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन हम इसे सफल नहीं होने देंगे.बैठक में अमेरिका के सामने मोदी सरकार के समर्पण के खिलाफ प्रस्ताव पेश करते हुए कहा गया कि इस केंद्र सरकार में भारत की संप्रभुता और लोकतांत्रिक ढांचे पर गहरा संकट मंडरा रहा है. सांसद राजाराम सिंह ने वक्फ बोर्ड से जुड़े हालिया विवादों पर जदयू को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जदयू की भूमिका इस मुद्दे पर पूरी तरह से संविधान और लोकतंत्र विरोधी रही है.
वक्फ बोर्ड को निशाना बनाना न सिर्फ मुस्लिम समुदाय पर हमला है, बल्कि यह भारत के संविधान की आत्मा पर भी प्रहार है.उन्होंने कहा कि वापस लिए गए कृषि कानूनों को अब पीछे के दरवाज़े से नई कृषि विपणन नीति के नाम पर फिर से लागू करने की कोशिश की जा रही है.आरा के सांसद सुदामा प्रसाद ने छोटे व्यापारियों और सहारा जैसे चिटफंड घोटालों में फंसे निवेशकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया. बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि पार्टी संगठनात्मक रूप से हर जिले में अपनी ताकत बढ़ा रही है और चुनाव पूर्व जन आंदोलनों को और तेज किया जाएगा.पार्टी नेताओं ने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार में लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा का की लड़ाई है.