By, Shrikant Pratyush
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शराबबंदी का बिहार में 3 साल पूरा, परिवार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

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कभी बिहार में शराब का कारोबार खुलम -खुल्ला हुआ करता था.कई लोग मदिरा पीकर खुलेआम सड़कों पर बवाल किया करते थें लेकिन अब बिहार में परिस्थितियाँ बदल चुकी है. बिहार में शराब बंदी कानून लागू है.

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शराबबंदी का बिहार में 3 साल पूरा, परिवार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

सिटी पोस्ट लाइव- कभी बिहार में शराब का कारोबार खुलम -खुल्ला हुआ करता था. कई लोग मदिरा पीकर खुलेआम सड़कों पर बवाल किया करते थें. लेकिन अब बिहार में परिस्थितियाँ बदल चुकी है. बिहार में शराब बंदी कानून लागू है. वहीं बिहार में शराबबंदी के तीन साल पूरे हो चुके हैं . 4 अप्रैल 2016 को राज्य सरकर ने पूर्ण शराबबंदी की घोषणा की थी. बिहार के जेंडर रिसोर्स सेंटर के सीनियर कंसल्टेंट एस आनंद कहते हैं कि बिहार में महिलाओं का खान-पान और बच्चों की पढ़ाई सुधरी है. महिलाओं के खिलाफ हिंसा में कमी दर्ज की गई है. 58% महिलाओं का कहना है कि पारिवारिक मामलों में उनकी निर्णय लेने की हैसियत बढ़ी है.

इस शराबबंदी से बिहार के कई जिलों कि स्थिति काफी सुधरी है. हालांकि पहले प्रतिबन्ध के कारण इससे जुड़े लोगों के आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ा .लेकिन बाद में उनलोगों ने अपने धंधे को बदल लिया और आज वें खुशी -खुशी अपने परिवार के साथ रह रहे हैं. जबकि पहले कुछ लोगों ने इसे अपना मुख्य व्यवसाय बना लिया था. कुछ लोगों ने इस धंधे को बंद कर चाय की दूकान खोल लिया और आज इससे उनकी इतनी अच्छी इनकम हो रही है कि वे पुरे परिवार के साथ इज्जत भरी जिन्दगी जी रहे हैं.

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पूर्णिया की लाइन बस्ती में पहले शराब के लिए किशनगंज, कटिहार और अररिया तक से लोग पहुंचते थे. यहां लोगों की कमाई इसी से थी. शराबबंदी के बाद गांव की महिला ललिता देवी और समाजसेवी मणि कुमार ने संस्था बनाकर गाय पालन की योजना शुरू की. बिहार सरकार ने इसी टोले के 11 लोगों को शराब छोड़कर मुख्यधारा से जोड़ने की कवायद के तहत गाय दी गई. इस पहल ने गांव के लोगों को नई ऊर्जा दी और उन्होंने शराब के बजाय दूध का कारोबार किया. ललिता देवी और मणि कुमार द्वारा 50 से अधिक लोगों को गाय दिलाई गईं. गांव को दुग्ध समिति की भी स्वीकृति मिल गई. अब यहाँ ये लोग दूध का बड़ा व्यवसाय कर रहे हैं.

वहीं शराबबंदी के बाद महिलाओं कि भागीदार सभी क्षेत्रों में बढ़ी है. अब उनकी आर्थिक स्थिति भी सुधरी है. महिलाओं ने माना कि शराबबंदी के बाद घरों में निर्णय लेने में उनका प्रभाव बढ़ा है. अब वे अपने बच्चों के शिक्षा पर भी खूब खर्च कर रही हैं. पारिवारिक कलहों में भी काफी कमी आई है. जबकि पहले कई घटनाएं ऐसी घटती थीं कि शराब पीकर शराबी बच्चों और पत्नी तक की हत्या कर देते थें.

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