By, Shrikant Pratyush
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इंसेफेलाइटिस से अब तक 48 बच्चों की मौत, केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की टीम करेगी जांच

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हर साल की तरह इस साल भी बारिश के साथ गर्मी की शुरुवात होने के साथ ही तिरहुत ईलाके में खासतौर पर मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में इन्सेफेलाइटिस से बच्चों की मौत की खबर आने लगी है.

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इंसेफेलाइटिस से अब तक 48 बच्चों की मौत, केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की टीम करेगी जांच

सिटी पोस्ट लाइव : हर साल की तरह इस साल भी बारिश के साथ गर्मी की शुरुवात होने के साथ ही तिरहुत ईलाके में खासतौर पर मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में इन्सेफेलाइटिस से बच्चों की मौत की खबर आने लगी है. मौत का ये सिलसिला जारी है. दिमागी बुखार जिसे चमकी नाम दिया गया है, कहर मचा रहा है. इस बीमारी से होने वाली मौत का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है. पिछले 24 घंटे में 10 और बच्चों ने दम तोड़ दिया है तो वहीं 23 नए बच्चों को भर्ती कराया गया है. मरने वाले दस बच्चों में से सात की मौत एसकेएमसीएच में जबकि तीन की मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई है.

इस बीच नये बीमार बच्चों को इन दोनो अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. तत्काल 60 बच्चे दोनों अस्पतालों में भर्ती हैं. एसकेएमसीएच के शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ गोपाल शंकर सहनी नें बताया कि बीमार बच्चों की संख्या में बढोतरी की वजह से दो नये पीआईसीयू खोले गये हैं. वैसे कई बच्चे ठीक होकर घर भी लौट रहे हैं. अबतक मिली जानकारी अनुसार 48 बच्चों की मौत हो चुकी है. वहीं 60 बच्चों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. इससे पहले रविवार की रात से सोमवार देर रात तक 20 बच्चों की मौत हो गई थी.

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इस जानलेवा बीमारी से पूरे इलाके में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है. जिनके भी छोटे बच्चे हैं सभी खौफ में हैं कि कही इस जानलेवा बीमारी से उनकी बच्चे ग्रसित ना हो जाएं. वहीँ इस बीमारी से निपटने के लिए केंद्र से भी डॉक्टरों की टीम मुजफ्फरपुर पहुँचने वाली है. इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की सात सदस्यीय टीम पटना पहुंच चुकी है. जो आज मुजफ्फरपुर जाएगी. बता दें  इससे पहले बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा था कि बच्चों की मौत एईएस यानि इनसेफेलाइटिस से नहीं हुई है. उन्होंने कहा था था कि 10 बच्चों की मौत हाईपोगलेसिमिया से हुई है, जबकि एक बच्चे की मौत जापानी इनसेफेलाइटिस से हुई है. उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत को लेकर विभाग गम्भीर है. लेकिन अब आंकड़े भी बढ़ चुके हैं और बीमारी की गंभीरता भी.

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