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पटना : बिहार सरकार ने आगामी विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी के बीच बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए 36 प्रशासनिक अधिकारियों का तबादला किया है। ये सभी अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) स्तर के अधिकारी हैं, जिन्हें राज्य के विभिन्न जिलों में नए दायित्व सौंपे गए हैं। इस आदेश को सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया है।यह फेरबदल ऐसे समय हुआ है जब राजनीतिक हलचलें तेज हैं और विपक्ष सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने के आरोप लगा रहा है।

तबादलों का यह कदम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह ऐसे समय पर किया गया है जब राज्य में चुनावी माहौल बनना शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बदलाव सरकार की चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें चुनावी प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में रखने के लिए ‘अनुकूल अधिकारियों’ को तैनात किया जा रहा है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह तबादला प्रशासन को अधिक कुशल और प्रभावी बनाने के मकसद से किया गया है।
पिछले घटनाक्रमों ने बढ़ाई संवेदनशीलता
हाल ही में कुछ SDM स्तर के अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे। उदाहरणस्वरूप दरभंगा में SDM द्वारा राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम को प्रतिबंधित करने का प्रयास। कल्याण बीघा (नालंदा) में प्रशांत किशोर को कार्यक्रम में भाग लेने से रोकने की कोशिश।


प्रशांत किशोर का यह आरोप कि उनके पार्टी के नालंदा जिलाध्यक्ष को भी SDM द्वारा धमकाया गया। इन घटनाओं ने निचले स्तर के प्रशासन में राजनीतिक दबाव या पक्षपात की आशंका को जन्म दिया है। ऐसे में तबादलों की यह बड़ी सूची सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेह का विषय भी बन गई है।