By, Shrikant Pratyush
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झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का को हत्याकांड में उम्रकैद की सजा

विधायक एनोस एक्का को धारा 302, 120 बी, 201 और 171 एफ के तहत दोषी माना था

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कोर्ट ने विधायक एनोस एक्का के खिलाफ आजीवन कारावास की सजा के अलावा एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. गौरतलब है कि शनिवार को एनोस एक्का सहित तीन को सिमडेगा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट ने दोषी करार दिया था.

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सिटी पोस्ट लाइव : पारा टीचर हत्याकांड मामले में झारखंड के विधायक, झारखंड के पूर्व मंत्री एनोस एक्का को कोर्ट ने मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई दी है. कोर्ट ने विधायक एनोस एक्का के खिलाफ आजीवन कारावास की सजा के अलावा एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. गौरतलब है कि शनिवार को एनोस एक्का सहित तीन को सिमडेगा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरज कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट ने दोषी करार दिया था. सजा के बिंदु पर तीन जुलाई की तिथि निर्धारित की थी. इसी को लेकर मंगलवार को सुनवाई हुई और फैसला सुनाया गया .

अपर जिला एवं सत्र कोर्ट ने कोलेबिरा विधायक एनोस एक्का को धारा 302, 120 बी, 201 और 171 एफ के तहत दोषी माना था. इस सजा के साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो चुकी है. पारा शिक्षक मनोज कुमार की हत्या नवंबर 2014 में हुई थी. फिलहाल हत्या के आरोप में गिरफ्तार एनोस एक्का रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंद हैं.गौरतलब है कि  26 नवंबर 2014 को सिमडेगा जिले के जताडांड़ प्राथमिक विद्यालय से पारा टीचर मनोज कुमार का अपहरण हुआ था. इस मामले में विधायक एनोस एक्का के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. इसके दूसरे दिन सुबह मनोज कुमार की लाश मिलने के बाद मामला हत्याकांड में बदल गया. पुलिस ने पहले से पीएलएफआइ उग्रवादी बारूद गोप का मोबाइल फोन सर्विलांस पर रखा था. फोन पर हुई बातचीत के आधार पर पुलिस ने जांच के बाद विधायक एनोस एक्का और बारूद गोप के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया.

आरोप है कि विधायक के कहने पर बारूद गोप ने मनोज कुमार की हत्या की. घटना को अंजाम देने से पहले उग्रवादी धनेश्वर बड़ाइक ने रेकी की थी. शिक्षक की हत्या के आरोप में तत्कालीन एसपी राजीव रंजन सिंह ने रात दो बजे एनोस एक्का को ठाकुरटोली स्थित घर से गिरफ्तार किया था. 27 नवंबर 2014 की शाम को एक्का को जेल भेजा गया था. हत्या से पहले मनोज कुमार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ज्ञापन सौंप कर सुरक्षा की गुहार लगायी थी. लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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