By, Shrikant Pratyush
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औरंगाबाद:आजादी से आज तक नहीं बना है दक्षिणी उमगा पंचायत के जमुनियां गाँव में सड़क

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बिहार में बहार है फिर से नीतीशे कुमार है का नारा, जरूर आपने चुनावों के वक्त सुना होगा. लेकिन अगर इस नारे के बारे में उनसे पूंछे जो इस समय रोड न बनने के कारण जलजमाव की समस्या से जूझ रहे हैं तो यह नारा एक दिखावटी लगेगा. कुछ ऐसी ही कहानी है औरंगाबाद जिले के उस सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र की जहां सड़कों का नामोनिशान तक नहीं है.

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औरंगाबाद:आजादी से आज तक नहीं बना है दक्षिणी उमगा पंचायत के जमुनियां गाँव में सड़क

सिटी पोस्ट लाइव-बिहार में बहार है फिर से नीतीशे कुमार है का नारा, जरूर आपने चुनावों के वक्त सुना होगा. लेकिन अगर इस नारे के बारे में उनसे पूंछे जो इस समय रोड न बनने के कारण जलजमाव की समस्या से जूझ रहे हैं तो यह नारा एक दिखावटी लगेगा. कुछ ऐसी ही कहानी है औरंगाबाद जिले के उस सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र की जहां सड़कों का नामोनिशान तक नहीं है. यह क्षेत्र है मदनपुर प्रखंड के अंतर्गत दक्षिणी उमगा पंचायत का जमुनियां गाँव.

वैसे तो यह दक्षिनी उमगा पंचायत शुरू से ही घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है जो आजादी के 72 वर्षों के बाद भी विकास के कार्यों से महरूम है . इस गांव में आज भी सड़कों का नामोनिशान तक नहीं है .यह गाँव प्रखंड मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण पहाड़ की तलहटी में बसा है. यहाँ एक हजार से अधिक लोग निवास करते हैं लेकिन इस गाँव के आस-पास दो किलोमीटर तक सड़कों का नामोनिशान तक नहीं है. इस बारे में जन अधिकार छात्र परिषद के निर्वतमान प्रदेश महासचिव सह मगध प्रमण्डल प्रभारी विजय कुमार उर्फ गोलू यादव का कहना है कि इस इलाके में अधिकतर दलित-पिछड़े लोग रहते हैं जिस कारण भी इन समस्याओं पर जिले के जनप्रतिनिधी ध्यान नहीं देते हैं और इस क्षेत्र के लोग केवल वोट बैंक बनकर रह गये हैं. जाप नेता ने कहा कि इस समस्या को लेकर जल्द ही हमलोग भूख हड़ताल करेंगे.

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आपको बता दें कि बरसात के दिनों में यहाँ तीन महीने तक सड़क की समस्या के कारण मदनपुर और पंचायत मुख्यालय दक्षिण उमगा से गांव का संपर्क टूट जाता है . जिस कारण इस गांव के बच्चों को स्कूल जाने में काफी कठनाइयों का सामना करना पड़ता है. वहीं रात्री में अगर किसी की तबियत खराब हो जाती है तो मरीज को अस्पताल ले जाने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. कई बार तो मरीज तत्काल स्वास्थ्य केंद्र तक न पहुँच पाने के कारण बीच रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं.
                               जे.पी.चंद्रा की रिपोर्ट

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