By, Shrikant Pratyush
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बिहार बीजेपी से अश्वनी चौबे, गिरिराज सिंह जैसे केंद्रीय मंत्रियों का कट सकता है टिकट

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लोकसभा चुनाव नजदीक आने के बावजूद भी बिहार के राजनीतिक दलों के नेताओं में टिकट को लेकर संशय बरकरार है. सीटों का बँटवारा नहीं होने के कारण महागठबंधन ही नहीं बल्कि एनडीए के प्रत्याशियों में भी उहा-पोह की स्थिति बनी हुई है.

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बिहार बीजेपी से अश्वनी चौबे, गिरिराज सिंह जैसे केंद्रीय मंत्रियों का कट सकता है टिकट

सिटी पोस्ट लाइव – लोकसभा चुनाव नजदीक आने के बावजूद भी बिहार के राजनीतिक दलों के नेताओं में टिकट को लेकर संशय बरकरार है. सीटों का बँटवारा नहीं होने के कारण महागठबंधन ही नहीं बल्कि एनडीए के प्रत्याशियों में भी उहा-पोह की स्थिति बनी हुई है. पिछली बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 30 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये थें जिसमें बीजेपी को 22 सीटों पर अप्रत्याशित जीत मिली थी. लेकिन इस बार उसे मात्र 17 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है.बाकी की सीटें उसने अपने सहयोगियों के लिए छोड़ना पड़ा है. दरअसल पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने सहयोगी दलों को सिर्फ 10 सीटें दीं थीं.

ऐसी परिस्थिति में बीजेपी के सामने कुछ सांसदों के टिकट काटने के अलावा उसके पास कोई विकल्प नहीं है. इसमें 5 सीटींग सांसदों का टिकट भी है . जिसमें  बेगुसराय के सांसद भोला सिंह की मौत हो चुकी है और दरभंगा के सांसद कीर्ति आजाद और पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा पहले ही पार्टी से बगावत का रास्ता चुन चुके हैं फिर भी पार्टी को 2 सीटिंग सांसदों का टिकट काटना पड़ेगा जो शीर्ष नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती है. बीजेपी नेतृत्व के लिए सिर्फ 5 सांसदों का टिकट काटना ही चुनौती नहीं है इससे बड़ी चुनौती है बिहार से अपने चारों केंद्रीय मंत्रियों की वर्तमान सीट बचाना. गठबंधन के सहयोगी दलों ने 2014 के लोकसभा में जीतकर आए चारों मंत्रियों की सीट पर अपना दावा ठोक दिया है. ऐसे में पार्टी के सामने संकट है कि इनकी सीटिंग सीट कैसे बचाएं और अगर सीटिंग सीट सहयोगी के पाले में जाती है तो इन नेताओं को कहां से चुनाव लड़ाया जाए?

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एलजेपी ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की नवादा सीट को अपने खाते में आने का औपचारिक ऐलान भी कर दिया है. हालांकि बीजेपी नेता और खुद गिरिराज सिंह इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं. गिरिराज सिंह के करीबी लोगों का मानना है कि 2014 के लोकसभा चुनावों में जब वे बेगुसराय सीट मांग रहे थे तो पार्टी ने उन्हें नवादा भेज दिया और वहां से वे चुनाव जीते भी लेकिन जब पांच साल तक उन्होंने नावादा में काम किया तो अब उन्हें बेगुसराय भेजा जा रहा है. केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्वनी चौबे की बक्सर सीट को लेकर भी जेडीयू-बीजेपी में अभी तक बात तय नहीं हो पाई है.

यदि अश्विनी चौबे की बात करें तो 2014 के लोकसभा चुनाव में जब वें भागलपुर से टिकट मांग रहे थे तो पार्टी ने उन्हें बक्सर का टिकट थमा दिया था, लेकिन बक्सर सीट पर इस बार जेडीयू ने अपना दावा ठोक दिया है. सूत्रों की मानें तो अगर ये सीट जेडीयू के खाते में गई तो अश्वनी चौबे को भागलपुर भेजा जा सकता है. केन्द्रीय मंत्री राम कृपाल यादव की सीट पर भी पेंच फंसा हुआ है. जेडीयू ने पाटलीपुत्र या पटना साहिब दोनों में से एक सीट पर अपना दावा ठोक दिया है. अगर बीजेपी पटना साहिब से केंद्रीय मंत्री और पार्टी के कद्दावर नेता रविशंकर प्रसाद को उतारती है तो उसे पाटलीपुत्र सीट जेडीयू को देनी पड़ सकता है. ऐसे में रामकृपाल सिंह कहां जाएंगे? ये अभी तक तय नहीं हुआ है.

वहीं अगर विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो केन्द्रीय मंत्री आर के सिंह की सीट भी जेडीयू के दावों वाली लिस्ट में है. इस प्रकार औरंगाबाद जिले के लोकसभा सीट की बात करें तो वहाँ भी बीजेपी का जेडयू के साथ तकरार है. क्योंकि वहाँ से अभी सांसद सुशील कुमार हैं जो बीजेपी के हैं. हालांकि पहले वे जेडयू के ही सदस्य थें परन्तु पिछले लोकसभा चुनाव में वें बीजेपी ज्वाइन कर लिए थें. अब जेडीयू इसे अपना परम्परागत सीट मान कर छोड़ना नहीं चाहती है. लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह है कि जहां सांसदों को अब अपने लोकसभा क्षेत्र में प्रचार -प्रसार करना था वे सीटों की लॉबिंग में व्यस्त हैं.

जे.पी.चन्द्रा की रिपोर्ट

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