By, Shrikant Pratyush
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“विशेष” : बिहार महागठबंधन में टूट की आशंका, एक नए गठबंधन बनने की संभावना प्रबल

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बिहार महागठबंधन में टूट की आशंका धीरे-धीरे बढ़ रही है। राजद के पॉवर बैंड तेजस्वी यादव की अति महत्वाकांक्षा से कांग्रेस, हम सहित गठबंधन के लगभग सभी दल अपने को ठगा और पिछलग्गू समझ रहे हैं।

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“विशेष” : बिहार महागठबंधन में टूट की आशंका, एक नए गठबंधन बनने की संभावना प्रबल

सिटी पोस्ट लाइव “विशेष” : बिहार महागठबंधन में टूट की आशंका धीरे-धीरे बढ़ रही है। राजद के पॉवर बैंड तेजस्वी यादव की अति महत्वाकांक्षा से कांग्रेस, हम सहित गठबंधन के लगभग सभी दल अपने को ठगा और पिछलग्गू समझ रहे हैं। राजद पहले कांग्रेस को 11 सीट देने का मन बना रही थी लेकिन अब कांग्रेस की औकात 8 सीट देकर तय की जा रही है। हम के जीतनराम मांझी दलित- महादलित के बड़े नेता बताकर कम से कम पांच सीट मांग रहे हैं। भीआईपी के मुकेश सहनी को महागठबंधन में अपनी असली हैसियत का पता ही नहीं चल पा रहा है। जाप के पप्पू यादव के लिए राजद ने नो एंट्री का बोर्ड लगा दिया है।

इस समय राजद फ्रंटफुट पर खेलने की तमाम कोशिशों में जुटा हुआ है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को होता दिख रहा है।शरद यादव की नई नवेली पार्टी लोजद को भी इस महागठबंधन से कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। उन्हें केवल एक सीट, सिर्फ उनके लिए देने की बात चल रही है और वह सीट है मधेपुरा। कांग्रेस के बौने हो रहे कद से कई कांग्रेसी नेता उबल रहे हैं। शिवहर सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की शर्त पर कांग्रेस में शामिल हुई पूर्व सांसद लवली आनंद पर भी राजद की तलवार लटकी हुई है। पूर्व सांसद आनंद मोहन कांग्रेस की इस दुर्गति से बेहद मर्माहत हैं और सहरसा जेल के अंदर गर्माहट के साथ चहलकदमी कर रहे हैं।

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आनंद मोहन के सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस को आनंद मोहन के जनाधार को पहले शिरोधार्य करना चाहिए, फिर हम के जीतनराम मांझी, जाप के पप्पू यादव, भीआईपी के मुकेश सहनी, रालोसपा (अरुण गुट) के अरुण कुमार की ताकत को समेटकर वाम मोर्चा को साथ लेना चाहिए और एक नया गठबंधन बनाकर चुनावी समर में उतरना चाहिए। इससे कांग्रेस को काफी फायदा होता ।इधर शरद यादव की पार्टी लोजद के भीतरखाने से सूचना मिल रही है कि शरद यादव ने कांग्रेस, रालोसपा, जाप, हम और वाम मोर्चा से तालमेल कर चुनाव लड़ने की पेशकश कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से की है। इन दोनों गठबंधन पर कांग्रेस गहन चिंतन-मनन और बहस-विमर्श में जुटी हुई है।

यह जानकारी हम सूत्रों के आधार पर समेटकर आप सभी से साझा कर रहे हैं। हम इसकी प्रमाणिकता को लेकर कुछ भी कहने से असमर्थ हैं। महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद अभी ओवर कान्फिडेंस का शिकार हुई प्रतीत हो रही है। राजद के सीट बंटवारे के फ्रेम में रघुवंश प्रसाद सिंह, जगदानंद सिंह, मनोज झा, अब्दुल बारी सिद्दकी और रामचन्द्र पूर्वे कहीं नहीं नजर आ रहे हैं। ऐसे में महागठबंधन में राजद के राजकुमार तेजस्वी यादव अपने फैसले को सभी दलों को मानने के लिए मजबूर कर रहे हैं। आज से लेकर अगर कल दोपहर बाद तक स्थिति साफ नहीं हुई तो बिहार में एक अलग गठबंधन हमसभी को देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर आनंद मोहन और पप्पू यादव के जनाधार का कांग्रेस भरपूर उपयोग कर सकती है। लेकिन अभी ताल ठोंककर हम कुछ भी नहीं कहेंगे ।राजनीति में कब कौन सी पलटी मार जाए,कयास लगाना बेमानी है। इतना तो तय है कि देश भर में बिहार कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा चैलेंज बना हुआ है। इधर आनंद मोहन सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि अगर महागठबंधन में कांग्रेस शिवहर से लवली आनंद को टिकट देने में असमर्थ साबित होती है तो, लवली आनंद शिवहर से ही निर्दलीय प्रत्यासी होंगी ।अभी भी कांग्रेस की मैराथन वार्ता राजद के साथ चल रही है। लेकिन महागठबन्धन की सीट शेयरिंग का पेंच सुलझ नहीं पा रहा है।वैसे कल देर शाम तक हर तरह के रहस्य पर से पर्दा उठना तय है।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह की “विशेष” रिपोर्ट

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