बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। राज्यसभा की 5 सीटों के लिए हो रहे मतदान के बीच महागठबंधन के 4 विधायक (3 कांग्रेस और 1 राजद) अचानक लापता हो गए हैं। इस “खेला” ने राजद प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह की राह मुश्किल कर दी है और NDA के लिए पांचों सीटें जीतने का रास्ता साफ कर दिया है।

क्यों बिगड़ा तेजस्वी-ओवैसी का खेल?
राजद उम्मीदवार को जीत के लिए महागठबंधन के शत-प्रतिशत वोटों के साथ AIMIM और बसपा के समर्थन की भी जरूरत थी। विधायकों के टूटने से यह आंकड़ा अब पहुंच से बाहर लग रहा है। मनोहर प्रसाद जैसे पुराने वफादारों का वापस लौटना यह दर्शाता है कि नीतीश कुमार का ‘रिमोट कंट्रोल’ आज भी विपक्षी खेमे के कई नेताओं पर प्रभावी है। हालांकि, कई विधायकों ने अपने व्यापारिक हितों और भविष्य के मुकदमों से बचने के लिए पाला बदलना ही बेहतर समझा।

किन विधायकों ने बदला पाला और क्यों?
| विधायक का नाम | पार्टी | क्षेत्र | मुख्य कारण |
| सुरेंद्र प्रसाद | कांग्रेस | वाल्मीकिनगर | उपेंद्र कुशवाहा के करीबी; व्यवसाय (रेलवे ठेका, बस, पेट्रोल पंप) की सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास के लिए सत्ता का साथ जरूरी। |
| मनोज विश्वास | कांग्रेस | फारबिसगंज | दल बदलने का पुराना इतिहास (JDU->RJD->CONG); भाजपा के गढ़ में टिके रहने के लिए NDA का समर्थन मजबूरी। |
| मनोहर प्रसाद सिंह | कांग्रेस | मनिहारी | मूल रूप से नीतीश कुमार के करीबी; पूर्व IPS अधिकारी रहे मनोहर पहले भी नीतीश के कहने पर ही कांग्रेस में गए थे। |
| फैसल रहमान | RJD | ढाका | महज 178 वोटों से जीत; चुनाव में धांधली के आरोप और कोर्ट-कचहरी के चक्कर से बचने के लिए पाला बदला। |
ड्रॉप कोटा फॉर्मूला;
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए वोटों का निर्धारण ड्रॉप कोटा फॉर्मूले से होता है। विधायकों के गायब होने से अब जीत का समीकरण बदल गया है:
1) सामान्य स्थिति (243 विधायक होने पर):एक सीट के लिए आवश्यक वोट:

2) वर्तमान स्थिति (4 विधायक अनुपस्थित होने पर):कुल वैध वोट
