By, Shrikant Pratyush
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बिहार में चमकी बुखार का कहर अब भी जारी, 3 बच्चों ने तोड़ा दम, आंकड़ा 180 के पार

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बिहार में (AES ) एक्यूट इनसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार के कहर से अब तक 180 बच्चों की मौत हो चुकी है. मुजफ्फरपुर में AES ने फिर से कहर बरपाया है. जिले के सबसे बड़े SKMCH अस्पताल में चमकी बुखार से पीड़ित 3 और बच्चों ने दम तोड़ दिया है.

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बिहार में चमकी बुखार का कहर अब भी जारी, 3 बच्चों ने तोड़ा दम, आंकड़ा 180 के पार

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार में (AES ) एक्यूट इनसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार के कहर से अब तक 180 बच्चों की मौत हो चुकी है. मुजफ्फरपुर में AES ने फिर से कहर बरपाया है. जिले के सबसे बड़े SKMCH अस्पताल में चमकी बुखार से पीड़ित 3 और बच्चों ने दम तोड़ दिया है. चौकाने वाली बात ये है कि एसकेएमसीएच में मौत का आंकड़ा 141 तक जा पहुंचा है. लेकिन सरकार और डॉक्टर कुछ भी करने में असमर्थ हैं. मरने वाले ये सभी बच्चे SKMCH में गंभीर हालत में भर्ती थे. बता दें कि बिहार में चमकी बुखार से अब तक 180 बच्चों की मौत हो चुकी है. बिहार में चमकी बुखार का कहर 12 जिलों में है लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर मुजफ्फरपुर में है.

आपको  बता दे कि मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा में कहा था. कि सरकार एईएस यानी चमकी बुखार से हो रही मौतों को लेकर पूरी तरह से संवेदनशील है. सदन में जवाब देते हुए सीएम नीतीश ने कहा कि सरकार डॉक्टरों और नर्स की कमी पर काम कर रही है. जिलों में नर्सिंग कॉलेज खुल रहे हैं लेकिन बच्चों की मौत के कारणों को विशेषज्ञ भी अभी तक नहीं जान पाए हैं.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्षणों के आधार पर ही बच्चों का इलाज किया जा रहा है. मुज़फ़्फ़रपुर के मामले में सरकार ने पूरी गंभीरता से काम किया है और सभी मृतकों के सोशल इकनॉमिक ऑडिट करने का हमने निर्देश दिया है. नीतीश कुमार ने कहा कि जो भी बच्चे मरे हैं वो सभी लगभग गरीब परिवारों से आते हैं. बीमारी से भर्ती हुए बच्चों में भी लड़कियों की संख्या ज्यादा है.

वहीँ सीएम चमकी बुखार से पीड़ित लोगो के लिए सभी तरह की सुविधाओ उपलब्ध करने की बात कही है उन्होंने कहा है कि सीएम ने कहा कि जिनके घर नही हैं उनके घर बनेंगे और इसके लिए मुख्यमंत्री आवास योजना से उनको घर बनाने में मदद मिलेगी. जिनका जमीन नहीं है उन्हें 60 हजार अनुदान जमीन के लिए मिलेगा. साथ ही साथ उन्होंने जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि बीमारी से बचाव के लिए अभी भी जागरूकता की कमी है. मुज़फ़्फ़रपुर में गहनता के साथ जांच की जरूरत है.

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