सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक बयानबाजी चरम पर है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ वाले बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने पलटवार करते हुए महागठबंधन के दो प्रमुख चेहरों राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को ‘नटवरलाल’ करार दिया है। इसके साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द कर उन्हें तत्काल जेल भेजने की मांग करके सियासी पारा और बढ़ा दिया है।
एक बिहार का, दूसरा दिल्ली का नटवरलाल
पटना में मीडिया से मुखातिब होते हुए अश्विनी चौबे ने तीखे तेवर अपनाए। उन्होंने कहा कि “ये सभी लोग, चाहे राहुल गांधी हों या तेजस्वी यादव, सब एक जैसे हैं। एक बिहार का नटवरलाल है, दूसरा दिल्ली का नटवरलाल है।” चौबे ने आरोप लगाया कि दोनों नेता एक ही लीग के हैं और उनके पास चर्चा करने के लिए कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि महाठगबंधन (महागठबंधन) का एकमात्र मकसद लोगों को गुमराह करना और भ्रम पैदा करना है। चौबे ने विश्वास व्यक्त किया कि 14 नवंबर को जब चुनाव परिणाम घोषित होंगे, तब जनता ‘झूठ बोलने वाले, भ्रष्टाचार करने वाले, वंशवाद फैलाने वाले, जंगलराज पैदा करने वाले और अपराधियों का राजनीतिकरण करने वाले’ राजद और कांग्रेस को कड़ा सबक सिखाएगी।
बंपर वोटिंग मतलब NDA सरकार
पहले चरण के मतदान में हुई बंपर वोटिंग पर खुशी जाहिर करते हुए भाजपा नेता ने दावा किया कि एनडीए के पक्ष में माहौल है और एनडीए की सरकार बन रही है। उन्होंने कहा कि जनता ने शत-प्रतिशत आशीर्वाद दिया है और नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे। तेजस्वी यादव के शपथ लेने संबंधी बयानों पर तंज कसते हुए चौबे ने कहा कि तेजस्वी यादव का सपना पूरा नहीं होगा और वे चुनाव के बाद कालकोठरी के मुख्य कैदी होंगे।
लालू को जेल भेजने की मांग
अश्विनी चौबे ने लालू प्रसाद यादव के चुनावी प्रचार में शामिल होने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि लालू यादव जमानत पर बाहर हैं, लेकिन वे अपराधियों का प्रचार कर रहे हैं, जिन्हें उन्होंने टिकट दिया है।
चौबे ने कोर्ट से आग्रह किया है कि लालू यादव की जमानत रद्द की जाए और उन्हें वापस जेल के अस्पताल में रखा जाए, क्योंकि वे हिंसक प्रवृत्ति के हैं। उन्होंने आशंका जताई कि “लालू यादव बाहर रहेंगे तो हिंसा फैला देंगे।” यह बयान बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर सकता है, जहां लालू यादव की उपस्थिति चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती है।