संसद का बजट सत्र हंगामे की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। गुरुवार को भी सदन की कार्यवाही में कोई विशेष सुधार नहीं दिखा। एक ओर जहाँ विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की गरिमा और अपनी कार्यशैली को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। स्पीकर ने कहा कि “सदन विचारों और चर्चा का जीवंत मंच है। यहाँ सहमति और असहमति की परंपरा रही है, लेकिन अंततः सदन नियम और प्रक्रियाओं से ही चलेगा।”
राहुल गांधी का हमला;
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद परिसर में LPG सिलेंडर की कमी को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए कहा- पीएम देश से कह रहे हैं कि घबराएं नहीं, लेकिन वे खुद अदानी मामले और एपस्टीन प्रकरण जैसे कई कारणों से घबराए हुए हैं। वहीं, उन्होंने कल सदन में पीएम की कुर्सी खाली रहने पर भी तंज कसा।
लोकसभा अध्यक्ष का पक्ष;
| प्रमुख बिंदु | ओम बिरला का वक्तव्य |
| संतुलन और प्रयास | मैंने हमेशा पक्ष और विपक्ष के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। |
| नए सांसदों को मौका | जो सांसद बोलने में संकोच करते थे, उन्हें चैंबर में बुलाकर प्रोत्साहित किया ताकि लोकतंत्र मजबूत हो। |
| महिला भागीदारी | आरोपों के विपरीत, मुझे गर्व है कि मेरे कार्यकाल में सभी महिला सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिला। |
| निलंबन की कार्रवाई | निलंबन एक कठोर निर्णय है जो सदन की गरिमा बचाने के लिए लेना पड़ता है। सदस्यों के साथ मेरे व्यक्तिगत संबंध दलगत राजनीति से ऊपर हैं। |
अप्रत्याशित घटना का जिक्र;
स्पीकर ने बजट चर्चा के दौरान महिला सदस्यों द्वारा ट्रेजरी बेंच की ओर जाकर नारेबाजी करने की घटना को ‘अप्रत्यक्ष’ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन की व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और जब सदस्य नियमों को नहीं मानते, तब सदन स्थगित करना मजबूरी बन जाती है।