By, Shrikant Pratyush
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डीपीओ ने वेतन मांगने पर शिक्षक को छत से नीचे फेंका,टूटी कमर: औरंगाबाद

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बिहार में शिक्षकों की आर्थिक स्थिती किसी से छुपी नहीं है. एक महीना ख़त्म नहीं होता है कि उनके सामने अगले महीने के लिए जीवन यापन की समस्या आ जाती है. लेकिन इस वेतन के लिए भी शिक्षकों को डीपीओ की दबंगई झेलनी पड़ती है. दरअसल बिहार में सर्व शिक्षा अभियान के डीपीओ की दबंगई का मामला सामने आया है.

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डीपीओ ने वेतन मांगने पर शिक्षक को छत से नीचे फेंका,टूटी कमर: औरंगाबाद

सिटी पोस्ट लाइव – बिहार में शिक्षकों की आर्थिक स्थिती किसी से छुपी नहीं है. एक महीना ख़त्म नहीं होता है कि उनके सामने अगले महीने के लिए जीवन यापन की समस्या आ जाती है. लेकिन इस वेतन के लिए भी शिक्षकों को डीपीओ की दबंगई झेलनी पड़ती है. दरअसल बिहार में सर्व शिक्षा अभियान के डीपीओ की दबंगई का मामला सामने आया है. मामला औरंगाबाद से जुड़ा है जहां बकाया वेतन संबंधी बात करने गये शिक्षक को कार्यालय की पहली मंजिल से अधिकारी ने नीचे फेंक दिया. इस घटना में शिक्षक की कमर टूट गई.

यह आरोप औरंगाबाद के सर्व शिक्षा अभियान के डीपीओ मिथिलेश कुमार सिंह पर लगा है. जख्मी शिक्षक फिलहाल जिन्दगी और मौत के बीच सदर अस्पताल में जुझ रहा है. गंभीर रूप से घायल शिक्षक सुधीर सिंह ने बताया कि भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे डीपीओ से जब उन्होंने बकाया वेतन के भुगतान को लेकर बात की तो इस पर थोड़ी बहस हो गई. इस बीच डीपीओ ने कार्यालय कर्मियों के साथ मिलकर पहली मंजिल से मुझे नीचे फेंक दिया.

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घटना की सूचना मिलते ही शिक्षक संघ से जुड़े पदाधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय सांसद सुशील कुमार सिंह भी शिक्षक का हाल जानने सदर अस्पताल पहुंचे. उन्होंने घटना की घोर निन्दा करते हुये ऐसे भ्रष्ट और दबंग प्रवृति के डीपीओ की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की और कहा कि यदि शिक्षक को न्याय नहीं मिलता है तो इसे लेकर एक बड़ा आंदोलन करेगें.

मालुम हो कि जब से मिथलेश कुमार सिंह ने D.P.O का पदभार सम्भाला है तब से वे किसी न किसी बात को लेकर विवादों से घिरे रहते हैं.उनपर कई बार दबंगई के आरोप लगे हैं .साथ ही उनपर अपने कार्यालय में पैसे लेकर भ्रष्टाचार फैलाने का आरोप भी लगता रहा है. शिक्षकों का कहना है कि उनके पास सारे कार्य घूस देकर ही करवाना पड़वाता है.
                                                                                                                                             जे.पी.चंद्रा की रिपोर्ट

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