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बेउर जेल में अपराधियों को 5 स्टार की सुविधा.

300KG सोना लूट गैंग के मास्टरमाइंड सुबोध ने खरीद रखी है बैरक, रखा है अपना अलग किचेन.

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सिटी पोस्ट लाइव :एक ज़माना था जब बिहार की जेलों में बंद कैदी आजाद पंक्षी हुआ करते थे.जब दिल करता घर चले जाते.मसाज पार्लर पहुँच जाते.जेल में दिल न लगा तो जेल में ही बाईजी को बुलाकर महफ़िल सजा लेते थे.आज भी कुछ इसी तरह की विशेष सुविधाएं जेल के कैदियों को बिहार में मिल रही है.देश के 5 राज्यों में सोना लूट को अंजाम देने वाली गैंग का मास्टरमाइंड सुबोध सिंह 5 साल से पटना की बेउर जेल में बंद है. वो यहीं से अपनी पूरी गैंग को ऑपरेट करता है. सुबोध सिंह के लिए जेल, जेल नहीं एक आरामगाह है. सुबोध सिंह जेल में रहकर उन सारी सुविधाओं का मजा लेता है जिन सुविधाओं के लिए जेल के बाहर भी लोग तरसते हैं.

सुबोध सिंह ने बेउर जेल में मौखिक रूप से अपने लिए एक वार्ड भी खरीदा है. इस वार्ड में सुबोध सिंह के लिए सारी सुख सुविधाएं मौजूद हैं… यहां तक कि सुबोध सिंह के गैंग में पकड़े गए लोग जब भी बेऊर जेल पहुंचते हैं तो सुबोध सिंह उन्हें अपने वार्ड में ही रखवा लेता है ताकि उनसे सुबोध सिंह मिलता रहे और उन्हें वह तमाम सुविधाएं दे सके… जो वह अपने गुर्गों को देता आया है.जब से सुबोध सिंह पटना के बेउर जेल में बंद है वह सेक्टर 3 की बैरक 21 और 22 में ही रहता है. इस दोनों कारागारों में सुबोध सिंह के गैंग के लोग और उसके जानने वाले लोग ही रहते हैं.

सुबोध सिंह की जेल में ऐसी पैठ है कि वह अपने गैंग के लोगों और अपने परिचितों को अपने ही वार्ड में रखवा लेता है.उनको किसी तरह की परेशानी नहीं होने देता.सुबोध सिंह के वार्ड में अलग से खाना बनाया जाता है.सुबोध सिंह के मनपसंद का खाना सुबोध सिंह के गुर्गे ही बनाते हैं. सुबोध सिंह के अलग-अलग तबके के गुर्गे सुबोध सिंह के लिए 24 घंटा सुबोध सिंह के वार्ड में ही मौजूद रहते हैं.सुबोध सिंह के हर छोटी बड़ी जरूरतों के लिए उसके गैंग के गुर्गे 24 घंटे तैनात रहते हैं.उसे नहलाने से लेकर मालिश कराने जैसी तमाम सुविधाएं उसके वार्ड में उपलब्ध हैं.

जेल में इस पैठ का सबसे बड़ा कारण है सुबोध सिंह का पैसा। सुबोध सिंह अपने पैसे के बल पर जेल के बाहर से हर वह चीज मंगा लेता है। कोई भी कैदी जेल में मोबाइल नहीं रख सकता लेकिन सुबोध कई बार जेल के भीतर से ही वीडियो बनाकर बाहर भेज देता है। हालांकि जेल में कैदी से मिलने वाले हर आदमी की गहनता से जांच होती है…लेकिन सुबोध सिंह के मामले में ऐसी बात नहीं है। सुबोध से मुलाकात करने वाले लोग की जांच बाहर खड़े पुलिस वाले भी बहुत गहराई से नहीं करते है.

सुबोध सिंह के वार्ड में बैठकी लगती है. सुबोध सिंह या सुबोध सिंह से संबंधित या सोना लूट कांड से संबंधित लोगों की पंचायती भी उसी वार्ड में की जाती है. सुबोध सिंह के गुर्गे अपना हर सुख-दुख सुबोध सिंह के उसी वार्ड में सुबोध सिंह से सांझा करते हैं. सुबोध सिंह सरपंच की तरह अपने वार्ड में बैठे बैठे अपनी गुर्गों की सुनवाई करता है. यही उसके फरियादी अपनी फरियाद सुबोध सिंह को सुनाते हैं उसके बाद सुबोध सिंह यह तय करता है कि सामने वाली की मदद कैसे और कितनी करनी है. अगर किसी कैदी ने कोई गलती कर दी तो सुबह सिंह ही उसकी सजा मुकर्रर करता है.

बेऊर जेल के सुप्रीटेंडेंट जितेंद्र कुमार के अनुसार अलग-अलग गैंग के खूंखार कैदियों को अलग-अलग रखना जेल प्रशासन की मजबूरी है. जेल में कास्ट बेस गैंग है…नक्सली गैंग हैं जिनको अलग अलग रखा जाता है. जेल प्रशासन इस बात का खास ख्याल रखती है कि किसी तरह दो गैंग के लोग आमने सामने ना आ जाएं क्योंकि यह तय है की आमने-सामने आते ही ये एक दूसरे के जान ले लेंगे.लेकिन सबसे बड़ा सवाल सुबोध को इतनी सुविधाएं जेल में कैसे मिलती हैं.इसका जबाब जेल प्रशासन के पास नहीं है.

गौरतलब है कि देश के 7 राज्यों से 300 किलो सोना लूटने वाले बिहार के सुबोध गैंग के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है. गैंग में 200 से ज्यादा शातिर बदमाश हैं. इनमें से कई सरगना सुबोध के साथ पटना की बेउर जेल में बंद है. सुबोध यहीं से चैन स्नैचर्स और सोना लूटने का वालों का इंटरव्यू लेता है और फिर अपनी गैंग में शामिल करता है.

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