ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटियास यूनिवर्सिटी हाल ही में अपनी किसी उपलब्धि के बजाय एक गंभीर विवाद के कारण चर्चा में रही। फरवरी 2026 में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान यूनिवर्सिटी पर तकनीक की “गलत ब्रांडिंग” के आरोप लगे।

विवाद की जड़: क्या था पूरा मामला?
समिट में यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक रोबोटिक डॉग प्रदर्शित किया गया था, जिसे “ओरियन” नाम दिया गया। विवाद तब शुरू हुआ जब यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने एक मीडिया इंटरव्यू में कथित तौर पर कहा कि इस रोबोट को यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में छात्रों द्वारा विकसित किया गया है। सोशल मीडिया और तकनीकी विशेषज्ञों ने तुरंत पहचान लिया कि यह चीनी कंपनी Unitree Robotics का व्यावसायिक मॉडल ‘Go2’ है। वहीं, भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में समिट आयोजकों ने सख्त रुख अपनाया। स्टॉल की बिजली काट दी गई और यूनिवर्सिटी को कार्यक्रम छोड़ने का आदेश दिया गया। आलोचनाओं के घेरे में आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर इसे ‘गलतफहमी’ करार दिया। यूनिवर्सिटी ने कहा कि मीडिया से बात करने वाली प्रतिनिधि “अल्प-शिक्षित” (ill-informed) थीं और उन्होंने बिना किसी आधिकारिक अनुमति के बयान दिया। सफाई में कहा गया कि रोबोट को कभी भी “स्व-निर्मित” नहीं बताया गया; इसे केवल छात्रों के शोध और कोडिंग सीखने के लिए एक ‘लर्निंग टूल’ के रूप में वहां रखा गया था।

स्थापना और संस्थापक की कहानी;
गलगोटियास यूनिवर्सिटी की स्थापना 2011 में हुई थी। इसके संस्थापक सुनील गलगोटिया हैं, जो गलगोटिया पब्लिकेशंस के मालिक हैं। सुनील गलगोटिया ने अपना करियर परिवार की किताबों की दुकान (ई.डी. गलगोटिया एंड संस) से शुरू किया, जो दिल्ली के कनॉट प्लेस में थी। 1980 में उन्होंने मात्र 9,000 रुपये के कर्ज से गलगोटिया पब्लिकेशंस शुरू किया। शुरुआत में किताबें छापीं, बाद में विदेशी परीक्षाओं (जैसे GRE, GMAT आदि) की किताबों के प्रकाशन अधिकार मिले, जिससे बिजनेस तेजी से बढ़ा। 2000 में शिक्षा क्षेत्र में कदम रखा: गलगोटिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (GIMT) और गलगोटिया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी शुरू किए, जहां शुरुआत में सिर्फ 40 छात्र थे। इनकी सफलता के बाद 2011 में यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई। आज इसका कैंपस 52 एकड़ में फैला है, और यह इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, लॉ, फार्मेसी आदि कोर्स ऑफर करता है। वर्तमान में CEO उनके बेटे ध्रुव गलगोटिया हैं, और ग्रुप का टर्नओवर हजारों करोड़ में बताया जाता है। यह एक छोटे बुकस्टोर से शुरू होकर शिक्षा साम्राज्य तक पहुंचने की प्रेरक कहानी है, लेकिन विवादों ने इसे अक्सर सुर्खियों में लाया है।

प्रमुख विवादों का इतिहास;
गलगोटियास यूनिवर्सिटी पहले भी कई बार विवादों में रही है। यहां कुछ प्रमुख घटनाएं हैं:
1) 2026: रोबोट डॉग विवाद (इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट)
– जैसा ऊपर वर्णित, चीन से आयातित रोबोट को अपना इनोवेशन बताने का आरोप। यूनिवर्सिटी को समिट से निकाला गया, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कवरेज हुआ, और माफी मांगनी पड़ी।
2) 2024: राजनीतिक प्रदर्शन विवाद
– लोकसभा चुनाव के दौरान कुछ छात्र कांग्रेस मुख्यालय के बाहर “इनहेरिटेंस टैक्स” और अन्य मुद्दों पर प्रदर्शन करते दिखे। वीडियो वायरल हुए, जहां छात्र मुद्दों की जानकारी नहीं दे पाए। आरोप लगा कि उन्हें अटेंडेंस या मजबूरी में लाया गया था।
3) 2024: कैंपस में मारपीट
– छात्रों के दो ग्रुप के बीच क्लास में सीटिंग को लेकर झगड़ा, जो मारपीट में बदल गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और यूनिवर्सिटी की इमेज प्रभावित हुई।
2020: कोविड-19 फीस विवाद
– महामारी के दौरान छात्रों से फुल फीस और एक्स्ट्रा चार्जेस मांगने का आरोप। कई छात्रों ने विरोध किया, शिकायतें दर्ज हुईं। आर्थिक संकट के समय सख्ती पर भारी आलोचना हुई।