रेलवे यात्रियों के लिए खुशखबरी! काउंटर टिकट खोने पर भी अब नहीं डूबेगा आपका पैसा, जानें नया नियम…

Ritu Raj

भारतीय रेलवे के करोड़ों यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। अब वेटिंग टिकट खो जाने पर रिफंड मिलना “नामुमकिन” नहीं होगा। उपभोक्ता आयोग के एक हालिया फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल फिजिकल टिकट न होने के आधार पर रेलवे यात्रियों का पैसा नहीं रोक सकता।

क्या है पूरा मामला?
बता दें कि यह फैसला जिला उपभोक्ता आयोग, पटना ने विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के अवसर पर सुनाया। मामला पटना के कंकड़बाग निवासी शंभू नाथ से जुड़ा था। इस स्थिति में यात्री ने दिल्ली से पटना के लिए काउंटर से वेटिंग टिकट लिया था। हालांकि, टिकट कन्फर्म नहीं हुआ और इसी बीच मूल टिकट (Physical Ticket) खो गया। तो रेलवे ने रिफंड देने से यह कहकर मना कर दिया कि बिना मूल टिकट के भुगतान संभव नहीं है।

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उपभोक्ता आयोग का कड़ा रुख;
आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य रजनीश कुमार की पीठ ने रेलवे की दलील को खारिज करते हुए इसे ‘सेवा में कमी’ और ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ करार दिया। इसके साथ ही जिला उपभोक्ता आयोग,पटना ने कहा कि “यदि यात्री का टिकट कन्फर्म नहीं हुआ और उसने यात्रा नहीं की है, तो केवल टिकट गुम होने के आधार पर रिफंड रोकना न्यायसंगत नहीं है।”

आयोग द्वारा जारी निर्देश;

मदविवरण
टिकट की राशि₹2,398
ब्याज6% वार्षिक (28 मार्च 2014 से गणना)
मुआवजा₹5,000 (मानसिक उत्पीड़न के लिए)
कानूनी खर्च₹5,000 (मुकदमे की लागत)

यात्रियों के लिए इसके क्या मायने हैं?
– अधिकारों की जीत: यह फैसला एक नजीर बनेगा। अब यात्री डिजिटल रिकॉर्ड या ट्रांजैक्शन आईडी के आधार पर अपना पक्ष मजबूती से रख सकते हैं।
– लापरवाही पर लगाम: सरकारी विभागों को अपनी रिफंड प्रक्रिया को और अधिक सरल और ‘यूजर फ्रेंडली’ बनाने का संदेश मिला है।
– कानूनी बैकअप: यदि भविष्य में आपके साथ ऐसा होता है, तो आप इस फैसले का हवाला देकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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