By, Shrikant Pratyush
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हाई कोर्ट ने बिहार के शिक्षा एवं कानून मंत्री से माँगा जवाब ,बेटे को गलत तरीके से सरकारी वकील बनाने का मामला 

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बिहार के शिक्षा एवं कानून मंत्री अपने पुत्र मोह के कारण विवादों में फंसते नजर आ रहे हैं.कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा पर अपने बेटे मुकेश नंदन वर्मा को अवैध तरीके से लोक अभियोजक बनाने का आरोप है.

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हाई कोर्ट ने बिहार के शिक्षा एवं कानून मंत्री से माँगा जवाब ,बेटे को गलत तरीके से सरकारी वकील बनाने का मामला 

सिटी पोस्ट लाइव बिहार के शिक्षा एवं कानून मंत्री अपने पुत्र मोह के कारण विवादों में फंसते नजर आ रहे हैं.कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा पर अपने बेटे मुकेश नंदन वर्मा को अवैध तरीके से लोक अभियोजक बनाने का आरोप है.पटना हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की एकल पीठ ने सुशील कुमार चौधरी की रिट याचिका को सुनते हुए शुक्रवार को यह आदेश दिया. याचिका में आरोप है कि जहानाबाद की निचली अदालतों में इस तरह की कई अवैध नियुक्तियां हुईं हैं.नोटिस उन सभी लोगों को जारी हुई है, जिनकी नियुक्ति हुई है व जो इसके जिम्मेदार हैं. नोटिस का जवाब मिलने पर इस मामले की अगली सुनवाई 28 जून को होगी.

ऐसा आरोप है कि कोर्ट के बिना आदेश के विज्ञापन के पैनल को उन्होंने बनवाया. याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट दीनू कुमार ने कोर्ट को बताया कि 10 जनवरी 2019 को विधि विभाग से निर्गत अधिसूचना के तहत कानून मंत्री के पुत्र मुकेश नंदन वर्मा को जहानाबाद जिला के पॉक्सो कोर्ट का विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया. विधि विभाग द्वारा तीन अन्य वकील राकेश कुमार, संजय कुमार तथा श्याम नारायण को भी स्पेशल पीपी बनाया गया.

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यह भी आरोप है कि जहानाबाद जिला में बिना प्रक्रिया अपनाए 21 अपर लोक अभियोजक का भी पैनल बनाया गया. पीपी, एपीपी, स्पेशल पीपी एवं अन्य तरह के सरकारी पैनल बनाये जाने के पहले विज्ञापन निकाला जाना जरूरी है . हाईकोर्ट ने एक फैसले में साफ कर दिया था कि बिना विज्ञापन एवं विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाए सरकारी वकीलों का पैनल नहीं बनेगा.

इधर, पूर्व आईएएस व भूमि न्यायाधिकरण के प्रशासनिक सदस्य रहे के. पी. रमैया को हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल को पेश होने को कहा है. कोर्ट ने डीजीपी से कहा कि इस दिन आईजी रैंक के एक अफसर को भेजें. भ्रष्टाचार के मामले में अभियुक्त रमैया, अग्रिम जमानत खारिज होने के बावजूद एक साल से गिरफ्तारी टालते आ रहे हैं. एकल पीठ ने नोटिस जारी कर उनसे जवाब भी मांगा है. उन्होंने एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी है. मुख्य न्यायाधीश ए. पी. शाही व न्यायमूर्ति पार्थसारथी की पीठ ने अपील की त्वरित सुनवाई को नकारते हुए कहा-ये कानून से ऊपर नहीं हैं. बटाईदारी के मामले में रमैया ने 2015 में आदेश पारित किया था.

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