सिटी पोस्ट लाइव
विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है। उससे पहले सरकार का गठन करना होगा। चुनाव आयोग के पास सिर्फ 53 दिन का वक्त है। 2020 में तीन फेज में वोटिंग कराई गई थी। अब इतने कम वक्त में तीन फेज में चुनाव कराना मुश्किल है। बिहार में दो फेज में वोटिंग कराई जा सकती है। SIR की वजह से तारीखों के ऐलान में देरी हो रही है। वोटर लिस्ट पब्लिश होने तक तारीखों का ऐलान नहीं हो सकता। इससे ऐसे हालात बन गए हैं कि कम वक्त में चुनाव कराना होगा। 6 अक्टूबर के बाद तारीखों का ऐलान हो सकता है।
दो फेज में चुनाव हुए तो NDA को फायदा होगा। ‘बड़े दलों के पास ज्यादा संसाधन होते हैं। वे इसका फायदा उठा लेते हैं। ये पार्टियां बड़े नेताओं का भाषण लाइव टेलीकास्ट करती हैं। इससे उनकी पहुंच ज्यादा से ज्यादा लोगों तक हो जाती है। इसकी एक दूसरी वजह छठ पर्व है। छठ के बाद ही वोटिंग होगी। इसे देखते हुए RSS और धार्मिक संगठनों ने इसकी तैयारी की है। इस बार की तैयारी कुंभ की तरह है। ’‘ये संगठन छठ पूजा में आने वालों को साड़ी, नारियल, सूप के साथ आर्थिक मदद दे रहे हैं। इसका फायदा NDA को मिलेगा। लोगों को लाने-ले जाने की सुविधा दी जाएगी, BJP इसे भी भुनाने की कोशिश करेगी। ’
2015 में 5 फेज में वोटिंग कराई गई थी। तब BJP को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। पार्टी ने 157 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। इनमें से 53 सीट पर जीत मिली। BJP को सबसे ज्यादा 25% वोट मिले, लेकिन सीट के मामले में पार्टी तीसरे नंबर पर रही। तीन चरण में चुनाव होने पर फायदा महागठबंधन को मिल सकता है। इससे उन्हें प्रचार के लिए ज्यादा वक्त मिलता है। ‘महागठबंधन के पास चुनाव के लिए कम संसाधन है। इस मामले में NDA के मुकाबले महागठबंधन पिछड़ जाता है। इसके अलावा अगर पहले फेज में कुछ सीटें या एरिया में विपक्ष मजबूत होता है, तो उनका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और दूसरे फेज में उनका काम आसान होगा। विपक्ष इसी फीडबैक के आधार पर मुद्दों या जातीय समीकरणों के हिसाब से बदलाव कर सकता है। ज्यादा फेज में चुनाव होने पर पार्टियां अपने कमजोर एरिया में ज्यादा संसाधन झोंक सकेंगी।
2020 में तीन फेज में 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को वोटिंग हुई थी। रिजल्ट 10 नवंबर को आया था। पहले फेज में 71, दूसरे फेज में 94 और 78 सीटों पर वोटिंग हुई थी। इसमें RJD 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। BJP 74 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही। इसबार दो फेज में चुनाव होने से महागठबंधन की मुश्किल बढ़ेगी।
‘दो फेज में वोटिंग होती हैं तो सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा व्यवस्था की होगी। इसका मतलब है कि ज्यादा फोर्स चाहिए होगी। पोलिंग बूथ बढ़ेंगे, तो फोर्स की डिमांड होगी। सिक्योरिटी से लेकर पेट्रोलिंग और स्ट्रॉन्ग रूम तक फोर्स बढ़ानी होगी। लेकिन देश में बिहार के अलावा किसी और राज्य में चुनाव नहीं हैं। ऐसे में डिमांड के मुताबिक फोर्स मिल जाएगी। बिहार पुलिस के अलावा सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्स को लगाया जा सकता है। दो फेज में चुनाव के फायदे भी हैं। चुनाव लंबा खिंचने या ज्यादा फेज में कराए जाने पर आम लोगों की मुश्किलें बढ़ती है। ‘चुनाव के दौरान सरकारी तंत्र पूरी तरह पैरालाइज हो जाता है। कार्यकारी CM सामान्य फैसले भी नहीं ले सकते। इसलिए कम वक्त में चुनाव कराना आम लोगों के लिए फायदेमंद रहता है।
‘BJP और उसकी सहयोगी पार्टियां विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हैं। दावा है कि तैयारी ऐसी है कि हम 225 सीट जीतेंगे। चुनाव कभी भी हो, कहीं भी हो, बीजेपी कार्यकर्ता तैयार रहते हैं। ’JDU का कहना है कि ‘चुनाव की तारीख और फेज चुनाव आयोग तय करेगा। नीतीश कुमार की फौज चुनावी मोड में काम करती है। हमारे पास नीतीश कुमार का चेहरा है। यही हमारी चुनावी पूंजी है। हमें चुनाव में जाने में दिक्कत नहीं होती। ‘कांग्रेस का दावा है कि ‘चुनाव आयोग एक फेज में वोटिंग कराए या 10 फेज में। यह उनका मसला है। कांग्रेस की तैयारी बूथ स्तर तक है। लोगों से जुड़े मुद्दे उन तक पहुंचा चुके हैं। जनता के अधिकार की बात उन्हें समझा चुके हैं।