सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति का अवसर सिर्फ पकवानों का नहीं, बल्कि ‘शक्ति प्रदर्शन’ और ‘सियासी संदेश’ का भी रहा है। इस साल इस परंपरा को लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख तेजप्रताप यादव अपने निराले अंदाज में आगे बढ़ा रहे हैं। सोमवार को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान तेजप्रताप उस समय अपना आपा खो बैठे, जब उनसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव को न्योता देने को लेकर सवाल पूछा गया।
पत्रकारों के सवाल पर क्यों तिलमिलाए तेजप्रताप?
तेजप्रताप यादव पिछले एक हफ्ते से बिहार के दिग्गज नेताओं के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं और उन्हें 14 जनवरी के दही-चूड़ा भोज के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। पत्रकारों ने जब उनसे सीधा सवाल किया— “क्या आप मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी व्यक्तिगत रूप से न्योता देने जाएंगे?” यह सुनते ही तेजप्रताप भड़क गए। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, “आमंत्रण लेकर सब जगह जाएंगे, तो आपको क्यों बेचैनी है? आप लोगों को भी बुलाएंगे, जाकर न्यूज़ चलाइए।”
दही-चूड़ा के बहाने ‘जनशक्ति’ का प्रदर्शन
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी की करारी हार और पार्टी से अलग होकर अपनी नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ बनाने के बाद तेजप्रताप के लिए यह आयोजन बेहद अहम है। वह अपने पिता लालू यादव की उस विरासत को जिंदा रखना चाहते हैं, जहाँ मकर संक्रांति के बहाने धुर विरोधी भी एक टेबल पर नजर आते थे। 14 जनवरी को होने वाला यह महाभोज तेजप्रताप की राजनीतिक परिपक्वता और 2026 की नई बिसात का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है।
अब तक किसे मिला आमंत्रण?
तेजप्रताप यादव ने अपने दही-चूड़ा भोज के लिए व्यक्तिगत रूप से सक्रियता दिखाते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम दिग्गजों को आमंत्रित किया है। उन्होंने खुद जाकर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को आमंत्रण पत्र सौंपा। इसके साथ ही, उन्होंने विधायी निकायों के प्रमुखों, विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से मुलाकात कर उन्हें न्योता दिया। गठबंधन की राजनीति को साधते हुए उन्होंने वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और ‘हम’ अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन को भी आमंत्रित किया है। इस कड़ी में उन्होंने मंत्री लेशी सिंह, मदन सहनी और राज्य के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी सादर आमंत्रित कर अपनी राजनीतिक सक्रियता का परिचय दिया है।
2026 की राजनीति और तेजप्रताप की चुनौती
तेजप्रताप यादव का यह आयोजन इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि वे खुद को एक स्वतंत्र और गंभीर राजनेता के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं। अगर इस भोज में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव शामिल होते हैं, तो यह परिवार और गठबंधन की नई केमिस्ट्री की ओर इशारा करेगा। वहीं, अगर वे नहीं पहुँचते, तो तेजप्रताप की नई पार्टी की राह और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। फिलहाल, पटना के सियासी गलियारों में सिर्फ एक ही चर्चा है— क्या बड़े भाई का न्योता स्वीकार करेंगे नीतीश और तेजस्वी?