पटना के सियासी गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राजद नेता तेजस्वी यादव, जिन्होंने नीतीश सरकार को 100 दिनों की मोहलत दी थी, अब 74वें दिन ही आक्रामक मुद्रा में नजर आ रहे हैं। बजट सत्र से ठीक पहले तेजस्वी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब खामोशी का दौर खत्म हुआ और सदन से लेकर सड़क तक सरकार की घेराबंदी शुरू होगी। तेजस्वी अब ‘वेट एंड वॉच’ की नीति छोड़ चुके हैं। बजट सत्र में नीतीश सरकार की नाकामियों की फेहरिस्त खोलना और पार्टी के भीतर की ‘साफ-सफाई’ करना, 2025 के बाद उनके पुनरुत्थान की पहली बड़ी परीक्षा होगी।
बैठक का संदेश: कौन करीब, कौन हाशिये पर?
शुक्रवार को तेजस्वी के सरकारी आवास पर हुई राजद की बैठक सिर्फ रणनीति बनाने के लिए नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर ‘पावर स्ट्रक्चर’ बदलने का संकेत देने वाली थी। बैठक की सिटिंग अरेंजमेंट ने कई अनकहे सवालों के जवाब दे दिए। तेजस्वी के ठीक बगल में मीसा भारती की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि अब परिवार और भरोसेमंद चेहरे ही कमान संभालेंगे। राज्यसभा सांसद संजय यादव को सबसे दूर बैठाया जाना चर्चा का विषय रहा। 2025 की हार के बाद ‘जयचंद’ वाले आरोपों और पारिवारिक कलह के बीच यह संदेश साफ है कि बाहरी सलाहकारों के बजाय अब ‘ब्लड रिलेशन’ और जमीनी नेताओं को प्राथमिकता मिलेगी। सामने की कतार में अभय कुशवाहा की मौजूदगी सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश दिखी।
तेजस्वी का नया ‘सियासी मैनेजमेंट’ फार्मूला;
विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त और पार्टी के भीतर रोहिणी आचार्य व तेजप्रताप यादव के तीखे हमलों से सबक लेते हुए तेजस्वी ने अब पारिवारिक और सियासी संतुलन का नया मॉडल तैयार किया है। विधायकों और उम्मीदवारों को निर्देश दिया गया है कि वे आंगनबाड़ी की बदहाली, जर्जर उप-स्वास्थ्य केंद्र, स्कूलों में ड्रॉपआउट और युवाओं की बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर डेटा इकट्ठा करें। हार को स्वीकार करने के बजाय अब यह नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि जनता नहीं हारी, बल्कि सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और ‘छल-कपट’ से राजद को रोका गया। जीविका दीदियों को 2 लाख की मदद और रोजगार के वादों पर सरकार को घेरकर तेजस्वी ‘प्रो-पीपल’ इमेज को फिर से मजबूत करना चाहते हैं।
चुनौतियां अभी कम नहीं:
भले ही तेजस्वी ने नई घेराबंदी शुरू कर दी हो, लेकिन उनके सामने डगर इतनी आसान नहीं है। एक तरफ लालू परिवार पर कानूनी मामलों का शिकंजा कस रहा है, तो दूसरी तरफ तेजप्रताप यादव के बगावती तेवर घर के भीतर ही नई मुश्किल खड़ी कर रहे हैं।