By, Shrikant Pratyush
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BJP से अलग हो गई है JDU की राह,सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान

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बीजेपी और जेडीयू की राह अलग-अलग हो चुकी है. झारखंड में जेडीयू बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनने जा रही है. जेडीयू झारखण्ड विधान सभा की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है.

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BJP से अलग हो गई है JDU की राह, सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान

सिटी पोस्ट लाइव : बीजेपी और जेडीयू की राह अलग-अलग हो चुकी है. झारखंड में जेडीयू बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनने जा रही है. जेडीयू झारखण्ड विधान सभा की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. झारखण्ड जेडीयू के नए अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने झारखंड विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा ऐलान कर दिया है. जमशेदपुर में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में प्रदेश जेडीयू  के अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने सभी 81 विधानसभा सीटों चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है.पार्टी इस बार अकेले चुनाव लड़ने वाली है. मुर्मू ने कहा कि जेडीयू न सिर्फ अकेले चुनाव लड़ेगी बल्कि जीत हासिल कर अपने दम पर सरकार भी बनाएगी.

जेडीयू के इस एलान को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों के रिश्ते में तल्खी आ चूका है. मोदी कैबिनेट में शामिल होने से इंकार कर चुके नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल होने का जब बीजेपी को ऑफर दिया तो बीजेपी ने भी मना कर दिया. फिर ईफ्तार पार्टी के बहाने नीतीश कुमार का विपक्ष के नेताओं से मिलने जुलने का सिलसिला शुरू हो गया. बीजेपी को ये मेलजोल रास नहीं आया. गिरिराज सिंह ने इफ्तार पार्टी को लेकर नीतीश कुमार पर तंज कास दिया. अब झारखंड में अकेले लड़ने के ऐलान कर जेडीयू ने यह साफ़ कर दिया है कि आगे बिहार में भी उसकी राह बीजेपी से अलग हो सकती है.

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झारखण्ड में जेडीयू का कोई ख़ास जनाधार भले न हो लेकिन उसका सभी सीटों से चुनाव लड़ना ये साबित तो करता ही है कि वह बीजेपी की राह मुश्किल करना चाहता है. बीजेपी ने झारखण्ड की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के जेडीयू के एलान पर आपत्ति जताया है. बीजेपी के नेताओं का कहना है कि बीजेपी  गठबंधन धर्म का पूरी तरह पालन करती है. बहुमत आने पर भी सहयोगियों को सम्मान दे रही है. वैसे इस तरह का बयान देने से सहयोगी दलों के नेताओं को बचना चाहिए.

झारखंड जदयू अध्यक्ष का यह बयान ठीक उस समय आया है, जब बिहार में जदयू के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री विपक्षी दलों के इफ्तार पार्टी में शामिल हो रहे हैं और सहयोगी भाजपा के साथ संबंध सामान्य नहीं दिख रहा है. जनाधार से दूर और कमजोर संगठन वाली जदयू पार्टी के झारखंड अध्यक्ष इस तरह के बयान दे रहे हैं तो मतलब साफ है कि इस बहाने सहयोगी भाजपा पर दवाब बनाने की कोशिश की जा रही है.

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