By, Shrikant Pratyush
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“चुनाव विशेष” लालू की राह पर तेजस्वी, परिवार से बाहर किसी को नहीं बनने देंगे यादवों के नेता

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बिहार में चुनाव,चाहे लोकसभा का हो, विधानसभा का हो या फिर छोटे से छोटे जनप्रतिनिधि के लिए हो, इन तमाम चुनावों में जाति हावी रही है। आज हम बिहार की राजनीति में यादव नेता के वर्चस्व, हैसियत और अहमियत पर बात कर रहे हैं।

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“चुनाव विशेष” लालू की राह पर तेजस्वी, परिवार से बाहर किसी को नहीं बनने देंगे यादवों के नेता

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार में चुनाव,चाहे लोकसभा का हो, विधानसभा का हो या फिर छोटे से छोटे जनप्रतिनिधि के लिए हो, इन तमाम चुनावों में जाति हावी रही है। आज हम बिहार की राजनीति में यादव नेता के वर्चस्व, हैसियत और अहमियत पर बात कर रहे हैं। 80 के दशक से पहले बिहार की राजनीति में यादव नेता के तौर पर बिहार का सबसे बड़ा चेहरा राम लखन सिंह यादव का था।लेकिन उनके बाद बिहार की राजनीति में यादव जाति का कोई दमदार नेता नहीं हुआ। लेकिन फजां बदली और 90 के दशक में लालू प्रसाद यादव बिहार में यादवों के सर्वमान्य नेता स्वीकारे गए। ठेंठ और देहाती अंदाज में उनके बेबाक संवाद सभी वर्गों को लुभाते, रिझाते और हंसाते रहे। बिहार में लंबे समय तक उनका और उनके नाम का शासनकाल रहा।

हांलांकि उस काल को विपक्षी दलों ने “जंगलराज’ का नाम दिया था ।लालू यादव छात्र जीवन से राजनीति में हैं। करीब पांच दशक का उनका राजनीतिक जीवन है। लालू प्रसाद यादव अभी चारा घोटाले में रांची के होटवार जेल में बन्द हैं। उन्होंने जेल से एक संवाद के माध्यम से कहा है कि अपने 44 साल के सक्रिय राजनीतिक जीवन में वे पहली बार चुनाव से दूर हैं। उन्हें इस बात का बेहद दुःख और मलाल है। लेकिन उनकी दुखती रग से सीबीआई और न्यायालय को क्या फर्क पड़ने वाला है। लालू प्रसाद यादव ने अपने प्रभाव और प्रभुत्व से बिहार में किसी भी यादव नेता को यादवों का नेता नहीं बनने दिया ।बिजेंद्र यादव, देवेंद्र यादव, दिनेश चन्द्र यादव, पद्म श्री हुकुम देव नारायण यादव, नंद किशोर यादव, नरेंद्र नारायण यादव, रामकृपाल यादव,ददन पहलवान,नवल किशोर यादव,भाई वीरेंद्र सहित कई अन्य यादव नेताओं को लालू प्रसाद यादव ने सदैव अपने पीछे ही रखा।

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रामकृपाल यादव करीब तीन दशक तक लालू के हनुमान बनकर उनका सियासी झोला उठाते रहे लेकिन लालू प्रसाद यादव ने राम कृपाल यादव को स्वतंत्र राजनीति का कभी भी मौका नहीं दिया। थक-हारकर राम कृपाल यादव 2014 में लालू का साथ छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए और पाटलिपुत्रा से सांसद चुने गए। राम कृपाल यादव, इसबार भी पाटलिपुत्रा से बीजेपी के प्रत्यासी हैं ।मधेपुरा जिले के खुर्दा गाँव के रहने वाले पप्पू यादव 90 के दशक में अपराध जगत में एक दमदार हैसियत थे। धीरे-धीरे पप्पू यादव की छवि अपराधी से बाहुबली में तब्दील हो गयी ।यादव युवाओं के बीच पप्पू यादव की तूती बोलने लगी। धीरे-धीरे पप्पू यादव में बदलाव आते गए और उन्होंने राजनीति में यादव के एक नए चेहरे के रूप में ख्याति अर्जित कर ली।

विधानसभा से लोकसभा का सफर तय करने वाले पप्पू यादव बाहुबली की छवि के साथ-साथ जनता सेवा में भी जुट गए ।नतीजा यह हुआ कि यादव के स्थापित नेता के साथ-साथ सर्वसमाज भी उन्हें चाहने लगा। पप्पू यादव की बढ़ती लोकप्रियता लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को खटकने लगा। वैसे तेजस्वी की जिद पर लालू प्रसाद यादव के दिए राजद के टिकट पर ही पप्पू यादव ने मधेपुरा सीट से 2014 में जदयू के शरद यादव को पटखनी दी थी। लेकिन अधिक महत्वाकांक्षा और अपने बाहुबल पर घमंड ने पप्पू यादव की राह अलग कर दी। पप्पू यादव ने 2015 में अपनी अलग पार्टी जाप बना ली। लालू प्रसाद यादव को यह गंवारा नहीं हुआ।इसी का नतीजा है कि लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव, जो बिहार महागठबन्धन के अभी नायक हैं ने पप्पू यादव के लिए महागठबन्धन में नो एंट्री कर दी ।

अब तो पप्पू यादव और लालू परिवार में इतनी रंजिश बढ़ गयी है कि तेजस्वी यादव ने सुपौल से महागठबन्धन के कांग्रेस प्रत्यासी पप्पू यादव की पत्नी रंजीता रंजन के खिलाफ दिनेश यादव को सुपौल से निर्दलीय खड़ा करवा दिया है। दिनेश यादव को सुपौल राजद ना केवल समर्थन कर रहा है बल्कि पप्पू यादव से दो-दो हाथ करने की बात भी कर रहा है। पप्पू यादव मधेपुरा से जाप से खड़े हैं और जनसेवा, इंसानियत और अपनेपन से लोगों से वोट मांगते हुए अभी मजबूत स्थिति में हैं। दिल्ली में पप्पू यादव का सेवा सदन बिहार सहित अन्य प्रांतों के गरीब मरीजों के लिए किसी देवस्थल से कम नहीं है।

पप्पू यादव चुनावी रेस में हैं और सभी जाति के भावनात्मक पक्ष को अगर छूने में कामयाब हो गए,तो चुनावी परिणाम में उलट फेर की पूरी संभावना है। वैसे यह जाहिर हो चुका सच है कि तेजस्वी यादव पूरी तरह से पप्पू यादव की राजनीति का अवसान कराने पर तुले हुए हैं। तेजस्वी की यह साफ मंसा है कि लालू प्रसाद यादव यादव के परिवार का ही कोई सदस्य बिहार में यादवों का नेता होगा।साफ लहजे में यूँ कहें तो, तेजस्वी यादव बिहार में खुद को यादवों का नेता साबित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।

पीटीएन न्यूज मीडिया ग्रुप के सीनियर एडिटर मुकेश कुमार सिंह का “विशेष चुनावी विश्लेषण”

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