By, Shrikant Pratyush
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शव दफनाने के लिए इस परिवार को नहीं मिली दो गज जमीन, घर में ही शव दफनाया

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शव दफनाने के लिए इस परिवार को नहीं मिली दो गज जमीन, घर में ही शव दफनाया

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार के मधेपुरा के कुमारखंड प्रखंड के केवटगामा गांव में गरीब परिवार के लोगों को अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए दो गज जमीन नसीब नहीं हो सकी. मजबूरन उनका अंतिम संस्कार घर में ही किया गया. मधेपुरा के कुमारखंड प्रखंड के केवटगामा के कुछ परिवार काफी पिछड़े हैं. अपने परिजनों के शव को घर में ही जलाते या दफनाते हैं. ये अंतिम संस्कार वो न तो जान बुझ कर और ना ही इच्छा से करते हैं बल्कि उन्हें ऐसा गांव के दबंगों के खौफ से करना होता है.

दरअसल, गांव के ही जमींदार और किसान गावं के ईन मजदूर तबके के लोगों को अपनी जमीन या उसके आसपास के सरकारी जमीन में शवों को दफनाने की ईजाजत नहीं देते हैं. मजबूरी में इन्हें अपने मृत परिजनों का  अंतिम संस्कार अपने घर में ही करना पड़ता है. शवों को घर में ही दफनाते हैं. आज ताजा मामला इसी गावं के 40 वर्षीय सोहागिया देवी की मौत से जुड़ा है. जिसका अंतिम संस्कार परिवार के लोगों ने घर के ही गौशाला में किया. गांव के रामचंद ने बताया कि पूर्व में एक शव के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हो चुका था इसलिए घर में ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया.

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मामले की जानकारी के बाद ही मधेपुरा प्रशासन भी हरकत में आया. एसडीएम वृंदा लाल ने गांव पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने बताया कि यदि गांव में सार्वजनिक शमशान नहीं होगा तो सरकारी जमीन चिन्हित कर शमशान बनवाया जाएगा.अब जिला प्रशासन जो भी कहे ,यह वारदात सभी समाज के मुंह पर एक तगड़ा तमाचा से कम नहीं. कहने के लिए तो हम आजाद मुल्क में रहते हैं लेकिन अपने देश में गरीबों को शव दफनाने के लिए दो गज जमीन नसीब नहीं है.

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