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झारखंड में खून की कमी से अब किसी की नहीं होगी मौत

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सिटी पोस्ट लाइव, रांची: झारखंड में खून की कमी से अब किसी की मौत नहीं होगी और मरीज तथा उनके परिजन को ब्लड की आवश्यकता होने पर साथ में किसी डोनर को लेकर चलने की व्यवस्था भी खत्म होगी। इसके लिए सभी सहयोग जरूरी है। ये बातें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कही। हेमंत सोरेन सोमवार को विश्व रक्तदान दिवस परछह जिलों रांची, गुमला, पलामू, धनबाद, गिरिडीह और पूर्वी सिंहभूम जिले में में ब्लड कंपोनेंट सेप्रेशन यूनिट का वर्चुअल शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री झारखंड राज्य एड्स नियंत्रण समिति के यूट्यूब चैनल का विमोचन और डिजिटल प्रमाण पत्रों का वितरण किया। इस अवसर पर स्वैच्छिक रक्तदान के लिए झारखंड विशिष्ट कैलेंडर का भी शुभारंभ किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खून की कमी से राज्य में अब किसी की मौत नहीं होगी। इसे लेकर राज्य के हर जिले में अब ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट सेप्रेशन यूनिट की स्थापना का निर्णय लिया गया है। पहले चरण में छह जिलों में इसकी आधारशिला रखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अब राज्य में मरीज और उनके परिजन को ब्लड लेने के लिए साथ में डोनर लेकर चलने की जरुरत ना हो, ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान के युग में शरीर के कई हिस्सों को बनाने में सफलता मिली है,लेकिन ब्लड का कोई अब तक कोई विकल्प नहीं है, इसलिए रक्तदान को महादान कहा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्तदान करने से हार्ट अटैक समेत कई अन्य बीमारियों से भी बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड की युवती और बालिकाओं में रक्त की कमी की बात सामने आती है, महिलाओं को डिलीवरी और अन्य  बीमारियों के दौरान ब्लड की आवश्यकता है, इसकी जरुरत को पूरा करने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस बात के लिए प्रयासरत है कि महिलाओं और बच्चियों में खून की कमी ना हो और उन्हें एनिमिया जैसी बीमारी से मुक्त किया जाए।

इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ब्लड को ज्यादा दिनों तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है,इसलिए उसे अलग-अलग कंपोनेंट में बांट कर अधिक दिनों तक सुरक्षित रखने की जरुरत महसूस की गयी, इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस यूनिट की स्थापना की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि  रक्तदान करना व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है, जिस तरह से वाहन के लिए मोबिल को बदलने की जरुरत होती है,उसी तरह से ब्लड डोनेट करने से शरीर को नयी स्फूर्ति मिलती हैं। उन्होंने कि रक्तदान में किसी जात-धर्म की बात नहीं होती और यह सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देना है, डॉक्टर किसी हिन्दू-मुसलमान या सिख-ईसाई का नहीं, बल्कि ब्लड के गु्रप की खोज करते हैं।

राज्य में करीब एक लाख यूनिट ब्लड की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए रांची के भाजपा विधायक सी0पी0सिंह ने अन्य सभी जिलों में ब्लड सेप्रेशन यूनिट की स्थापना का आग्रह किया। विश्व रक्तदान दिवस पर पलामू जिले में रक्तदान करने वाले एक युवा ने कहा कि वह अब तक तीन बार ब्लड डोनेट कर चुका है और इससे उन्हें किसी तरह की कमजोरी या अन्य किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2008 में इसकी शुरुआत की गयी थी और 13 वर्षां बाद फिर से यह काम शुरू हुआ है। रक्तदान करने से लोगों को न सिर्फ अपने स्वास्थ्य और बेहतर बनाये रखने मे मदद मिलेगी, बल्कि कई लोगों को संकट की घड़ी में समय पर ब्लड मिल जाने से जान बचाने में भी सफलता मिल सकेगी।

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