मैं सिर्फ बिहार का गवर्नर हूं, धर्म या जाति का नहीं: आरिफ मोहम्मद खान

Manisha Kumari

सिटी पोस्ट लाइव  

पटना: बिहार के महामहिम राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने खुद को ‘मुस्लिम गवर्नर’ कहे जाने पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को धर्म या जाति के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे समाज में वैमनस्य और हिंसा का माहौल पैदा होता है। पटना में आयोजित जीटीआरआई 5.0 के समापन समारोह में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार किया और सनातन धर्म ग्रंथों के उद्धरण देते हुए धर्म व सद्भावना का संदेश दिया। इसी दौरान जब उनसे ‘मुस्लिम गवर्नर’ कहे जाने पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उनका दर्द छलक उठा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,”मैं सिर्फ बिहार का गवर्नर हूं, धर्म या जाति का नहीं। जनप्रतिनिधि का कोई धर्म या जाति नहीं होती।” 

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पूरे देश में जातीय जनगणना को लेकर मचे राजनीतिक घमासान के बीच राज्यपाल ने इशारों-इशारों में जातिवादी राजनीति पर भी करारा प्रहार किया। उन्होंने किसी नेता का नाम लिए बिना कहा कि जातीय विभेद से समाज में अशांति फैलती है और इससे केवल राजनीति चमकाई जाती है, लेकिन आम लोगों का कोई भला नहीं होता। मीडिया से बातचीत के दौरान भी राज्यपाल ने जातीय विभाजन पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति को उसकी जाति या धर्म के आधार पर पहचाना जाता है, तो समाज में तनाव और हिंसा का वातावरण बनता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे जाति और धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दें। 

जीटीआरआई 5.0 कार्यक्रम में देशभर के उद्यमियों और बिहार की नामचीन हस्तियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान बिहार के औद्योगिक विकास, व्यापार और स्टार्टअप सेक्टर पर विस्तार से चर्चा हुई। राज्यपाल ने बिहार को निवेश के लिए उपयुक्त बताते हुए सभी उद्यमियों से प्रदेश में निवेश करने की अपील की।  राज्यपाल के इस बयान के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है। जातीय जनगणना की मांग करने वाले विपक्षी नेताओं पर यह बयान एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। अब देखना होगा कि उनके इस बयान पर सियासी गलियारों से क्या प्रतिक्रिया आती है। 

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