शीतकालीन सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान – “सदन में ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए” पर सियासत तेज हो गई है। विपक्ष खास तौर पर कांग्रेस इस टिप्पणी पर लगातार हमला बोल रही है। इसी बीच कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने तीखा रिएक्शन देते हुए कहा कि “ड्रामा शब्द का इस्तेमाल वही कर रहे हैं, जो खुद सबसे बड़े ड्रामा मास्टर हैं।”
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने पीएम मोदी के ‘ड्रामा’ वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “जो खुद सबसे बड़े ड्रामा मास्टर हैं, वही हमें सीखाने की बात कर रहे हैं। ड्रामा कब और कैसे करना है, ये तो उनसे ही सीखना पड़ेगा। हम दिल से काम करते हैं, इसलिए ये ड्रामा हमें नहीं आता।” इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए कहा कि शीतकालीन सत्र की शुरुआत में पीएम मोदी ने संसद के अहम मुद्दों पर बोलने के बजाय फिर से “ड्रामेबाजी” की है। आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी जनता का ध्यान भटकाने में लगी है, जबकि संसद में असली मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्षों में सरकार ने कई विधेयक जल्दबाजी में पारित कराए। वहीं, कुछ तो 15 मिनट से भी कम समय में, और कई बिना किसी चर्चा के। किसान कानून, GST और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता जैसे विधेयक भी उसी तरह पास हुए थे।
कांग्रेस सांसदों का कहना है कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों को लगातार नज़रअंदाज़ कर रही है। उनका आरोप है कि मणिपुर जैसे संवेदनशील विषय पर प्रधानमंत्री तब तक मौन रहे, जब तक विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया। विपक्ष का दावा है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान काम के दबाव में कई बीएलओ अपनी जान गंवा रहे हैं, और ‘वोट चोरी’ समेत कई गंभीर विषयों पर तुरंत चर्चा होनी चाहिए। आगे उन्होंने कहा कि बीजेपी को अब ध्यान भटकाने का नाटक बंद करना चाहिए और संसद में बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक असमानता और संसाधनों की लूट जैसे मुद्दों पर गंभीर बहस होनी चाहिए। उनके मुताबिक, जनता वास्तविक समस्याओं से जूझ रही है, जबकि सत्ता पक्ष ‘ड्रामेबाजी’ में व्यस्त है। विपक्ष ने साफ संकेत दिया है कि ये सभी मुद्दे शीतकालीन सत्र में लगातार उठाए जाएंगे।