जन सुराज की करारी हार पर बोले प्रशांत किशोर – “जनता को खिचड़ी चाहिए, पुलाव कैसे खिला दें”

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की नवगठित पार्टी ‘जन सुराज’ को करारी शिकस्त मिली है, जिसके बाद संस्थापक प्रशांत किशोर ने परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। ‘जन सुराज’ ने सभी 243 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो पाई और सभी प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा।

जनता की पसंद, पुलाव या खिचड़ी

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चुनाव परिणामों के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत किशोर ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए भी जनता के चयन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “आप लोग जो हम लोग बोलते रहे हैं, उसको जाकर देख लीजिए। आपने कहा कि उम्मीदवार गलत चुने हैं। यहाँ जितने लोग बैठे हुए हैं, हमने यहाँ कुम्हरार विधानसभा में केसी सिन्हा को उम्मीदवार बनाया, और कुम्हरार की जनता ने केसी सिन्हा को हराकर किसी दूसरे को जिताया है। और मांझी से वाईवी गिरि को हराकर किसी दूसरे को जिताया है।”

किशोर ने जोर देकर कहा कि इस हार से उम्मीदवारों के व्यक्तिगत जीवन पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन यह जनता के जीवन को प्रभावित करेगा। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, “तो मेरे भाई, मैं समझता हूँ कि केसी सिन्हा के नहीं जीतने से उनके जीवन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, भाई कुम्हरार के जनता के जीवन पर फर्क पड़ेगा। अगर आपने मांझी से वाईवी गिरि को हरा दिया तो वाईवी गिरि का कोर्ट का प्रैक्टिस नहीं बंद हो जाएगा, मांझी के लोगों की दिक्कत बढ़ेगी।”

हार के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जनता मालिक है, और अगर जनता को खिचड़ी खाना पसंद है, तो उन्हें कोई पुलाव जबरदस्ती कैसे खिला सकता है। उन्होंने कहा, “अगर आपको खिचड़ी खाना चाहते हैं तो आपको कोई पुलाव कैसे खिला देगा, तो आप खिचड़ी खाइए और आनंद लीजिए।”

संन्यास के सवाल पर दिया यह जवाब
जब एक पत्रकार ने सीधा सवाल किया कि “तो संन्यास लीजियेगा और जनता ने आपको वोट नहीं दिया, जनता का दोष है?”, तो प्रशांत किशोर ने इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि “हम जनता को नहीं समझा पाए, यह ज़िम्मेदारी हम लोगों पे है।”

भविष्य की रणनीति पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “अभी तो हम लोग वापस जाकर अपने उस प्रारूप को देखेंगे जो हम लोग जनता के बीच लेकर गए थे, जो सोच, जो विचार, जो प्रारूप लेकर जनता के बीच गए थे, वो देखेंगे कि जनता को वो चाहिए भी नहीं चाहिए। अगर जनता को पढ़ा-लिखा लोग नहीं चाहिए, अगर जनता स्वच्छ छवि वाले लोग नहीं चाहिए, तो हम लोग तय करेंगे कि क्या करना है।”

चुनाव आयोग और ₹10,000 की घोषणा पर तीखी टिप्पणी
प्रशांत किशोर ने नीतीश सरकार द्वारा चुनाव से ठीक पहले महिलाओं को ₹10,000 दिए जाने की घोषणा और वितरण पर भी गंभीर सवाल उठाए। “वादा करना एक बात है और रुपया देना दूसरी बात है।”

प्रशांत किशोर ने प्रत्यक्ष तौर पर चुनाव आयोग पर टिप्पणी करते हुए कहा प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि “पहली बार देश में ऐसा हुआ है कि वोटिंग के दो दिन पहले, चार दिन पहले आपको बकायदा दस हजार रुपया दिया गया है और ये कहा गया है कि आप अगर एनडीए को वोट देंगे, नीतीश कुमार को वोट देंगे तो आपको दो लाख रुपया दिया जाएगा।”

प्रशांत किशोर ने इसे भारतीय राजनीति के इतिहास में एक अप्रत्याशित घटना बताया। उन्होंने कहा, “ऐसा इस देश के राजनीतिक इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ है। ऐसा कभी नहीं हुआ है कि आचार संहिता के बाद, आचार संहिता लागू होने के बाद आप एक-एक विधान सभा क्षेत्र में 60 हज़ार से 62 हज़ार महिलाओं को दस-दस हजार रुपये दे रहे हैं, और आप राजनीतिक शुचिता की बात कर रहे हैं।”

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