RJD का नया ‘सोशल इंजीनियरिंग’ दाँव, क्या बिगड़ेगा NDA का गणित?

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की बिसात बिछनी शुरू हो गई है और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने लोकसभा चुनाव वाला अपना सफल ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का दाँव एक बार फिर खेला है। यह दाँव सीधे तौर पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पारंपरिक वोट बैंक पर सेंध लगाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। RJD की इस रणनीति का केंद्र कुशवाहा समाज है, जो बिहार की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका रखता है।

सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर यह है कि पूर्णिया के पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा जल्द ही RJD का दामन थामने वाले हैं। चर्चा है कि पार्टी उन्हें सीधे धमदाहा विधानसभा सीट से मौजूदा मंत्री लेसी सिंह के खिलाफ मैदान में उतार सकती है। कोसी-सीमांचल क्षेत्र में इसे एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। इसी क्रम में, एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम में एलजेपी (रामविलास) के नेता अजय कुशवाहा भी आज दोपहर RJD में शामिल होने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि RJD उन्हें वैशाली सीट से टिकट देने की योजना बना रही है।

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सोशल इंजीनियरिंग का गणित और जातीय समीकरण
RJD का यह कदम केवल नेताओं की दल-बदल नहीं, बल्कि एक ठोस सोशल इंजीनियरिंग रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। बिहार की आबादी में कुशवाहा समाज की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से अधिक है और यह वोट बैंक पारंपरिक रूप से नीतीश कुमार और JDU का मजबूत आधार माना जाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ चुनावों में इस समुदाय का एक हिस्सा RJD और कांग्रेस की तरफ झुका है, जिसे अब तेजस्वी यादव की पार्टी राजनीतिक रूप से भुनाने की फिराक में है।

पार्टी का मानना है कि यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण की सीमाओं से बाहर निकलकर, अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और गैर-यादव ओबीसी (OBC) समुदायों को साधने के लिए कुशवाहा समाज को अपने पाले में लाना बेहद ज़रूरी है। लोकसभा चुनाव 2024 में भी RJD ने कई सीटों पर कुशवाहा उम्मीदवारों को मौका देकर इस रणनीति का संकेत दिया था, जिसका लाभ उसे गठबंधन के रूप में मिला था। 2025 के विधानसभा चुनाव में, पार्टी इसी निरंतरता को बनाए रखना चाहती है।

JDU को सीधी चुनौती
RJD के इस ‘कुशवाहा फैक्टर’ को उभारने के कई मायने हैं:

JDU के आधार को कमजोर करना: कुशवाहा समाज नीतीश कुमार के कोर वोट बैंक का हिस्सा रहा है। इस कार्ड से RJD सीधे JDU के चुनावी आधार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

NDA के गणित में बदलाव: यदि RJD कुशवाहा मतदाताओं को बड़े पैमाने पर अपने पक्ष में लामबंद करने में सफल होती है, तो यह सीधे तौर पर NDA के जातीय गणित को बड़ा झटका दे सकता है।

MY से आगे की राजनीति: यह कदम RJD की ओर से यह स्पष्ट संकेत है कि पार्टी अब केवल MY समीकरण पर निर्भर न रहकर, समग्र ओबीसी राजनीति की ओर बढ़ रही है।

बिहार की सियासत में एक बार फिर “कुशवाहा फैक्टर” केंद्रीय भूमिका में आ गया है। RJD ने सबसे पहले चाल चलकर यह साफ कर दिया है कि 2025 का चुनाव सिर्फ गठबंधन बनाम गठबंधन की लड़ाई नहीं, बल्कि जातीय और सामाजिक समीकरणों की नई परिभाषा तय करेगा। कुशवाहा समाज पर कब्जे की यह निर्णायक लड़ाई अब शुरू हो चुकी है, और फिलहाल, RJD ने पहली बाजी खेल दी है।

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