पर्दे पर तो मिलीं खुशियां, पर असल जिंदगी में ‘दुल्हन’ बनने को तरस गई यह हसीना; एक हीरो की याद में काट दी पूरी उम्र!..

Ritu Raj

हिंदी सिनेमा के सुनहरे पर्दे पर हमने कई प्रेम कहानियाँ देखीं, लेकिन कुछ कहानियाँ कैमरे के पीछे ऐसी लिखी गईं जो रूह को झकझोर देती हैं। जब भी बॉलीवुड के ‘अधूरे इश्क’ का जिक्र होता है, तो अक्सर दिलीप-मधुबाला या राज-नरगिस के नाम लिए जाते हैं। लेकिन इन सबसे अलग, एक कहानी ऐसी भी है जहाँ एक हसीना ने अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ एक शख्स की याद में गुजार दी। यह कहानी है सुरैया और देव आनंद की।

एक डूबती नाव और शुरू हुआ ‘रोमांस’:
इस मोहब्बत की नींव 1948 में फिल्म ‘विद्या’ के सेट पर पड़ी थी। शूटिंग के दौरान एक नाव पलट गई और सुरैया गहरे पानी में डूबने लगीं। तब देव आनंद ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में छलांग लगाई और सुरैया को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। सुरैया ने उस वक्त कहा था, “अगर आज आपने मेरी जान न बचाई होती, तो मेरी जिंदगी खत्म हो जाती।” देव साहब का जवाब और भी गहरा था— “अगर आपकी जिंदगी खत्म होती, तो मेरी भी खत्म हो जाती।”

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7 फिल्में और 3000 रुपये का वो कर्ज:
दोनों की केमिस्ट्री पर्दे पर हिट रही और उन्होंने एक साथ 7 फिल्में कीं। देव आनंद, सुरैया के प्यार में इस कदर पागल थे कि उन्होंने अपने दोस्तों से 3000 रुपये कर्ज लेकर एक हीरे की अंगूठी खरीदी और सुरैया को प्रपोज किया। सुरैया ने हां तो कह दिया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

जब नानी और मजहब बन गए ‘दुश्मन’:
सुरैया जमाल शेख (मुस्लिम) और देव आनंद (हिंदू) के बीच सबसे बड़ी दीवार उनका परिवार और धर्म था। सुरैया की नानी इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थीं। धमकियाँ दी गईं, पाबंदियां लगीं और हालात इतने बिगड़े कि उस हीरे की अंगूठी को समंदर की लहरों के हवाले करना पड़ा। सुरैया ने अपनी मोहब्बत को सिर्फ इसलिए कुर्बान कर दिया ताकि देव आनंद पर कोई आंच न आए। “मैं तुम्हारी मौत की जिम्मेदार नहीं बनना चाहती” — यह कहकर सुरैया ने 1951 में देव आनंद से हमेशा के लिए दूरी बना ली।

ताउम्र तन्हाई और वो आखिरी खत:
देव आनंद ने बाद में शादी की और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए, लेकिन सुरैया ने कभी किसी और को अपने दिल में जगह नहीं दी। उन्होंने अपनी पूरी उम्र देव की यादों के सहारे काट दी। 31 जनवरी 2004 को जब उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा, तब उनके पास से एक खत मिला। जिसमें लिखा था कि उन्होंने 57 सालों तक हर रात देव का इंतजार किया और दुआ मांगी कि अगले जन्म में उनके बीच कोई दीवार न हो।

हालांकि, कहा जाता है कि जब 2011 में देव आनंद का निधन हुआ, तो उनकी जेब में सुरैया की एक तस्वीर मिली। यह इस बात का सबूत था कि भले ही समाज ने उन्हें अलग कर दिया, लेकिन रूह से वे कभी जुदा नहीं हुए।

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