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बिहार की राजनीति में ‘मिल्क मैन’ और अपने अनूठे अंदाज के लिए चर्चित तेज प्रताप यादव अब एक नई राजनीतिक पिच पर बैटिंग करने की तैयारी में हैं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से निष्कासन के बाद तेज प्रताप अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने में जुट गए हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर पार्टी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जेजेडी अब न केवल बिहार के स्थानीय चुनावों में उतरेगी, बल्कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में भी अपनी किस्मत आजमाएगी।
1 फरवरी को बुलाई गई ‘महाबैठक’
जनशक्ति जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष जय सिंह राठौड़ ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि आगामी 1 फरवरी को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता खुद तेज प्रताप यादव करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में संगठन की मजबूती, अनुशासन और आगामी चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पर अंतिम मुहर लग सकती है।
बंगाल में ‘बिहारी कार्ड’ खेलने की तैयारी
सबसे चौंकाने वाला फैसला जेजेडी का पश्चिम बंगाल चुनाव में उतरने का है। जय सिंह राठौड़ ने स्पष्ट किया कि पार्टी बंगाल की उन सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगी जहाँ बिहारी प्रवासियों और हिंदी भाषी आबादी की संख्या अधिक है। तेज प्रताप यादव को उम्मीद है कि बिहार की तर्ज पर बंगाल में भी उन्हें युवाओं और पिछड़े वर्ग का समर्थन मिलेगा। पार्टी का मानना है कि वह बंगाल में एक ‘मजबूत विकल्प’ के रूप में उभर सकती है।
सकारात्मक राजनीति का दावा
बिहार सरकार के प्रति पार्टी के रुख पर सफाई देते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जेजेडी ‘ब्लेम गेम’ यानी आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में यकीन नहीं रखती। सरकार के खिलाफ चुप्पी का मतलब कमजोरी नहीं, बल्कि सकारात्मक राजनीति की ओर एक कदम है। उन्होंने घोषणा की कि पार्टी आगामी निकाय उपचुनावों और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में भी पूरी ताकत के साथ उतरेगी।
तेज प्रताप यादव, जो अक्सर अपनी धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के कारण चर्चा में रहते हैं, अब अपनी इस नई पार्टी के जरिए बिहार और बंगाल की राजनीति में क्या फेरबदल करते हैं, यह 1 फरवरी की बैठक के बाद और अधिक स्पष्ट हो जाएगा।