बिहार की सियासत में ‘खेला’ शुरू: नीतीश के इस्तीफे की अटकलें तेज, क्या सम्राट चौधरी या निशांत कुमार बनेंगे अगले CM?…

Ritu Raj

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च को विधानमंडल की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। माना जा रहा है कि वे इस दिन बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ेंगे, जिसके बाद उनके मुख्यमंत्री पद से हटने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

दरअसल,नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। संविधान के नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता, इसलिए उन्हें तय समयसीमा के भीतर एक पद छोड़ना अनिवार्य है। इसी वजह से 30 मार्च की तारीख को अहम माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक वे 12 अप्रैल को राज्यसभा की शपथ ले सकते हैं और इसके बाद पटना लौटने का कार्यक्रम तय हो सकता है। इस घटनाक्रम के बीच उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे को लेकर भी अटकलें तेज हैं। अगर ऐसा होता है तो राज्य में नेतृत्व परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है, जिससे बिहार की राजनीति में नई दिशा देखने को मिल सकती है। अगर नीतीश कुमारके राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो उनका करियर काफी लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने 1985 में हरनौत से विधायक बनकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद वे लोकसभा पहुंचे और बाढ़ व नालंदा सीट से कई बार सांसद चुने गए। वे केंद्र सरकार में रेल मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं। साल 2005 में वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने और तब से राज्य की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभाते रहे हैं।

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अब उनके राज्यसभा जाने के बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ने की संभावनाओं ने राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है। इसी बीच उनके बेटे निशांत कुमार की सक्रियता भी चर्चा में है, जो हाल ही में जदयू से जुड़े हैं। इससे यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि पार्टी के भीतर नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की तैयारी हो सकती है। वहीं, राज्य में अगले मुख्यमंत्री को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। भाजपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम संभावित चेहरों में चर्चा में है। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की गतिविधियां भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कुल मिलाकर, अगर नीतीश कुमार इस्तीफा देते हैं, तो बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं और आने वाले समय में नई राजनीतिक रणनीतियां सामने आ सकती हैं।

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