बिहार भाजपा में खींचतान: दो दिन की बैठक बेनतीजा, उम्मीदवारों की अंतिम सूची अब दिल्ली से तय होगी

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया आसान नहीं रही है। हाल ही में पटना में दो दिनों तक चली बिहार भाजपा चुनाव समिति की लगातार बैठकें किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सकीं। सूत्रों की मानें तो पार्टी के भीतर इस बात को लेकर स्पष्ट मतभेद उभर आए कि 125 विधानसभा सीटों पर कौन सा उम्मीदवार सबसे उपयुक्त होगा। इस गतिरोध के बाद, यह तय किया गया है कि उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम मुहर दिल्ली स्थित केंद्रीय नेतृत्व ही लगाएगा, और बिहार इकाई का काम केवल घोषणा करना होगा।

दो दिन की माथापच्ची रही व्यर्थ
भाजपा की बिहार चुनाव समिति ने दो दिनों तक तीन-तीन घंटे लगातार मंथन किया, बावजूद इसके किसी भी सीट पर सहमति नहीं बन पाई। यह प्रक्रिया पहले से ही जटिल मानी जा रही थी, लेकिन मतभेद की गहराई ने बैठक को निष्कर्षहीन बना दिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मतभेद मुख्य रूप से इस बात को लेकर थे कि किस सीट पर स्थानीय संगठन की पसंद को तरजीह दी जाए या केंद्रीय रणनीति के अनुरूप नए चेहरों को मौका दिया जाए।

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बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पहले सीट बंटवारे का मामला पूरी तरह से फाइनल किया जाएगा, जिसके बाद ही उम्मीदवारों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत, जिला संगठनों से आए नामों को छांटकर एक छोटी सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि अंतिम निर्णय लेते समय दिल्ली को स्पष्ट और सीमित विकल्प मिल सकें, और संगठनात्मक अनुशासन भी बना रहे।

वर्तमान और हार वाली सीटों पर विशेष फोकस
बैठक में केवल आगामी उम्मीदवारों पर ही नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति पर भी गंभीर चर्चा हुई। पार्टी ने पिछली बार जीती हुई 80 सीटों के साथ-साथ उन 30 सीटों पर भी विशेष रूप से विचार किया जहां उसे हार का सामना करना पड़ा था। यह मंथन इस बात पर केंद्रित था कि किन मौजूदा विधायकों को पुनः मौका दिया जाए और किन हार वाली सीटों पर मजबूत और नए चेहरे उतारे जाएं ताकि अपनी स्थिति को मजबूत किया जा सके।

जानकारों का मानना है कि इस निष्कर्षहीनता का मुख्य कारण स्थानीय संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच मतभेद है। स्थानीय नेताओं ने अपने पसंदीदा नामों को आगे बढ़ाने की कोशिश की, जबकि केंद्रीय नेतृत्व जीत की संभावना और अपनी दीर्घकालिक रणनीति के आधार पर निर्णय लेना चाहता है।

अब दिल्ली दरबार पर टिकी निगाहें
भाजपा सूत्रों के अनुसार, अब यह रणनीति है कि बिहार में उम्मीदवारों का अंतिम चयन केंद्रीय नेतृत्व करेगा। इस प्रक्रिया से पारदर्शिता और संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलेगी। भले ही जिला स्तर पर पार्टी संगठन अपनी प्राथमिकता वाले नाम प्रस्तुत करेगा, लेकिन अंतिम निर्णय दिल्ली से ही होगा और उम्मीदवारों के नामों की औपचारिक घोषणा बिहार में की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह चुनाव भाजपा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में उम्मीदवार चयन में किसी भी प्रकार की देरी या गलती पार्टी की जीत की संभावनाओं पर सीधा असर डाल सकती है। सीट बंटवारे का सही तालमेल और मजबूत उम्मीदवारों का चयन ही भाजपा के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

बहरहाल, बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी में भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने का काम अब दिल्ली दरबार के जिम्मे है। बिहार के राजनीतिक गलियारों की निगाहें अब केंद्रीय नेतृत्व के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।

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