By, Shrikant Pratyush
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बक्सर के मुसहरी टोला में भूख से दो बच्चों की मौत,जांच में जुटा प्रशासन

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: बिहार बदल रहा है. बिहार आगे बढ़ रहा है.बिहार का ग्रोथ रेट देश मे सबसे अधिक है,बिहार में डबल  इंजिन की सरकार है. डिजिटल इंडिया के सपने बुने जा रहे हैं .लेकिन बिहार सरकार के अधिकारी सरकार के मुंह पर कालिख पोतने से बात नहीं आ रहे

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बक्सर के मुसहरी टोला में भूख से दो बच्चों की मौत,जांच में जुटा प्रशासन

सिटी पोस्ट लाइव : बिहार बदल रहा है. बिहार आगे बढ़ रहा है.बिहार का ग्रोथ रेट देश मे सबसे अधिक है,बिहार में डबल  इंजिन की सरकार है. डिजिटल इंडिया के सपने बुने जा रहे हैं .लेकिन बिहार सरकार के अधिकारी सरकार के मुंह पर कालिख पोतने से बात नहीं आ रहे. एक ऐसा ही मामला बिहार के बक्सर जिले में सामने आया है. बक्सर जिला मुख्यालय के डुमरांव अनुमंडल से मात्र 10 किलोमीटर दूर कोरानसराय थाना के मुसहरी टोला महादलित बस्ती से  एक  महादलित परिवार की दो बच्चे भूख और  भूख-जनित बीमारी से  तड़प तड़प कर मर जाने का मामला सामने आया है. ये आरोप है पीड़ित  दलित परिवार का जिसके दो बच्चों की एकसाथ मौत हो गई है.

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एक तरफ पूरा देश रक्षाबंधन का  जश्न मना रहा था .सबके घर में पकवान पाक रहे थे. दूसरी तरफ इस दलित बस्ती के दो बच्चे ( भाई-बहन) भूख  से तड़प रहे थे. इस महादलित परिवार की एक महिला  जिले के तमाम अधिकारियों से गुहार लगाती रही  लेकिन किसी ने इनकी नहीं सुनी. दवा-दारू की बात तो दूर ,इन्हें खाने के लिए अन्न के दो दाने भी उपलब्ध नहीं कराया गया.इस दलित परिवार की महिला का कहना है कि उसके  3 साल की बेटी और  5 साल के बेटे  कई दिनों से भूखे थे और भूख  ने ही उनकी जान ले ली.

मिली जानकारी के अनुसार कोरानसराय थाना क्षेत्र में लगभग दो महीना पहले एक सड़क दुर्घटना के दौरान स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर दिया था. पुलिस अपनी विफलता को छिपाने के लिए उस महादलित परिवार के कमाने वाले दोनों व्यक्ति समेत 25 लोगों को जेल में डाल दिया था .सड़क जाम कर हंगामा करनेवाले तो पैसे के बल पर जमानत लेकर छूट गए लेकिन इस महा-दलित परिवार का पेट भरनेवाला जेल से बाहर नहीं निकल पाए .इस दलित परिवार का कहना था कि घर चलानेवाले के जेल चले जाने से भूखमरी की नौबत पैदा हो गई. दो बच्चों ने भूख और भूख  जनित बीमारी से मर गए.

अपने बच्चों के खाने के लिए बच्चों की माँ  गाँव के राशन डीलर के पास भी मदद की गुहार लेकर गई थी.लेकिन उसने अन्न का एक दाना भी उसे नहीं दिया. जब बच्चे भूख से तड़प कर उसके दो बच्चे मर गए  और मामला उजागर होने लगा तो डीलर उसके घर  20 किलो चावल 20 गेहूं पहुंचा आया. मरने के पहले भूख मिटाने के लिए अन्न का एक दाना नहीं देनेवाला डीलर  भूख से मौत के बाद उसके घर 20 20 किलो गेहूं- चावल पहुंचा आया. दो बच्चे तो भूख से तड़प तड़प कर मर गए अब एक मां अपने बाकी बचे बच्चों को भुखमरी से बचाने के लिए शासन प्रशासन से अपने पति को जेल से बाहर निकालने की गुहार लगा रही है.

इस मामले की लीपापोती में जिला प्रशासन जुट गया है. डुमरांव अनुमंडल के एसडीएम हरेन्द्र राम का कहना है कि दो बच्चों की मौत भूख से नहीं बल्कि बीमारी से हुई है. हालांकि वो भूख से मौत हुई या बीमारी से इसकी जांच पड़ताल का आश्वासन भी दे रहे हैं. कारवाई का भरोसा भी दिला रहे हैं. साहब कह रहे हैं कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा .लेकिन क्या वो इस माँ को उसके बेटे वापस दिला पायेगें , इसका जबाब उनके पास नहीं है.परिवार कह रहा है कि उसके बच्चे कई दिनों से भूखे थे. फिर बीमार पड़ गए. जब भूख मिटाने के लिए घर में अन्न का एक दाना भी नहीं था फिर ईलाज कहाँ से करवाती एक माँ. वैसे भूख से हुई इस मौत की पुष्टि सिटी पोस्ट नहीं करता है. ये आरोप तो पीड़ित परिवार का है.सच्चाई क्या है जांच के बाद ही पता चल पायेगा. लेकिन ये मौतें भूख से हुई हों या बीमारी से जिला प्रशासन अपनी जिम्मेवारी से मुक्त नहीं हो सकता.बीमारी से भी अगर एक गरीब दलित के बच्चे शासन-प्रशासन की जानकारी के वावजूद भी मर गए तो यह वो दोषी हैं.

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