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बिहार चुनाव के बाद अब SIR (Special Intensive Revision) का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। बिहार की हार के बाद, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अखिलेश यादव को कड़ा संदेश दिया है, जिससे यह साफ है कि SIR को यूपी चुनावों में विवाद का मुद्दा बनाना महंगा पड़ सकता है।
बिहार विधानसभा चुनावों में महागठबंधन की करारी हार के बाद, अब SIR (Special Intensive Revision) का मुद्दा केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनावी हथियार बन चुका है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव जहां इसे ‘वोट कटवा अभियान’ मानते हुए बीजेपी और चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार के चुनाव परिणाम की याद दिलाते हुए एक कड़ा राजनीतिक संदेश दिया।
अखिलेश यादव ने हाल ही में आरोप लगाया था कि SIR के बहाने बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर विपक्ष के वोट काट रहे हैं, जिससे वोटर्स का अधिकार छिन रहा है। उन्होंने BLOs (Booth Level Officers) पर दबाव डालने का आरोप भी लगाया। लेकिन, उपेंद्र कुशवाहा ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि SIR कोई मुद्दा नहीं है और इसे मुद्दा बनाने की कोशिश करना बेकार है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने यह स्पष्ट कर दिया कि SIR कोई मुद्दा नहीं है और इसे मुद्दा बनाने से कुछ हासिल नहीं होगा।
बिहार की हार और यूपी के चुनाव
दरअसल, सितंबर 2025 में बिहार में हुए SIR के बाद महागठबंधन को सिर्फ 35 सीटें मिली थीं, जबकि एनडीए ने रिकॉर्ड बनाते हुए 202 सीटें जीतीं। अखिलेश ने ट्वीट किया था कि बिहार में SIR का खेल अब यूपी और बंगाल में नहीं चलेगा। लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिहार की जनता ने जातिवाद और भाईभतीजावाद को नकारते हुए विकास को चुना। उन्होंने यह भी कहा कि अब यूपी में विकास की दिशा में काम करना होगा और अखिलेश को सैफई लौटने की तैयारी करनी चाहिए।
अखिलेश यादव का नया रुख
अखिलेश यादव ने हाल ही में SIR के खिलाफ पार्टी कार्यकर्ताओं को अलर्ट रहने का संदेश दिया और यह रणनीति यह दिखाती है कि वह राहुल गांधी के साथ खड़े नहीं हैं, जिन्होंने इसे संविधान पर हमला बताया था। अब अखिलेश कह रहे हैं कि SIR का फायदा उठाकर वोट बचाओ, लेकिन वे कभीकभी इसे मुद्दा बना कर गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपेंद्र कुशवाहा का तंज अखिलेश यादव को एक चेतावनी है कि बिहार की गलती यूपी में न दोहराई जाए। अगर SIR को हथियार बनाया गया, तो इससे वोटर्स का भरोसा खो सकता है। दूसरी ओर, बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अखिलेश, राहुल और ममता ने हार मान ली है, और SIR को साजिश बताना हास्यास्पद है।
बिहार से यूपी तक का सियासी संदेश
बिहार के चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनता विकास के मुद्दे पर ध्यान देती है, न कि नारे और राजनीतिक झगड़ों पर। 2027 के यूपी चुनाव की तैयारी के लिए यह संदेश अहम हो सकता है।