पवन सिंह बनेंगे राज्यसभा सांसद? क्या बीजेपी पवन सिंह के लिए उठाएगी बड़ा जोखिम, बिगाड़ेगी राजनीतिक समीकरण ?

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाली जंग अब चेहरों से आगे बढ़कर ‘जातीय गणित’ पर टिक गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गलियारों में चर्चा है कि भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह को राज्यसभा भेजकर क्या पार्टी अपने पारंपरिक ‘अगड़ा-पिछड़ा’ (AP) समीकरण को जोखिम में डालेगी? राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भाजपा अपने कोटे की दोनों सीटें सवर्णों को देती है, तो इसका खामियाजा उसे आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ सकता है।

5 सीटों का गणित: किसका कटेगा पत्ता?
अप्रैल 2026 में खाली हो रही पांच सीटों में से दो राजद (प्रेम चंद गुप्ता, एडी सिंह), दो जदयू (हरिवंश, रामनाथ ठाकुर) और एक उपेंद्र कुशवाहा की है। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से ये पांचों सीटें एनडीए की झोली में जाना तय है।

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• JDU का रुख: जदयू अपने पुराने चेहरों हरिवंश नारायण सिंह (सवर्ण) और रामनाथ ठाकुर (अति पिछड़ा) को रिपीट कर संतुलन बनाए रख सकती है।

• LJP (R) का कोटा: चिराग पासवान की मां रीना पासवान का राज्यसभा जाना लगभग तय है, जो दलित समाज का प्रतिनिधित्व करेंगी।

भाजपा की दुविधा: नितिन नबीन और पवन सिंह का पेंच
भाजपा के पास दो सीटें आ रही हैं। एक सीट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन (सवर्ण) के लिए तय मानी जा रही है। अब दूसरी सीट के लिए पवन सिंह का नाम चर्चा में है। पवन सिंह ने विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए काफी पसीना बहाया है, जिसका इनाम उन्हें मिल सकता है।

लेकिन पेंच यहीं फंसता है। यदि नितिन नबीन और पवन सिंह दोनों को भेजा जाता है, तो भाजपा की दोनों सीटें सवर्ण (राजपूत और कायस्थ) समाज के खाते में चली जाएंगी। ऐसे में भाजपा का ‘अगड़ा-पिछड़ा’ संतुलन बिगड़ सकता है। पार्टी को शाहाबाद का वह ‘शून्य’ भी याद होगा, जहां पवन सिंह की बगावत ने लोकसभा चुनाव में भाजपा का गणित बिगाड़ दिया था।

क्या होगा ‘प्लान-बी’?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा पिछड़ों या अति-पिछड़ों को साधने के लिए पवन सिंह को एमएलसी (MLC) बनाकर राज्य की राजनीति में सीमित रख सकती है। दूसरी राज्यसभा सीट के लिए किसी कुर्मी या अति-पिछड़ा चेहरे पर दांव लगाया जा सकता है, ताकि नीतीश कुमार के वोट बैंक में सेंधमारी और अपने आधार वोट को मजबूती दी जा सके।

जीत का उन्माद या सधी हुई चाल?
उपेंद्र कुशवाहा को ड्रॉप किए जाने की खबरों के बीच भाजपा के लिए यह चुनाव ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की परीक्षा है। क्या भाजपा ‘लीक’ से हटकर पवन सिंह पर दांव लगाएगी या फिर जातीय संतुलन को प्राथमिकता देते हुए किसी ओबीसी नेता को संसद भेजेगी? इसका फैसला दिल्ली दरबार में जल्द होने वाला है।

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