By, Shrikant Pratyush
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टूट गई कुशवाहा की टीम ! तेजस्वी से मिलने पहुंचे रालोसपा के सिपाही माधव आनंद

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बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कई राजनितिक पार्टियां अपने फायदा अनुसार गठबंधन करने को लेकर अपना स्टैंड क्लियर नहीं क्र पाई हैं.इन पार्टियों में से एक रालोसपा भी है.. रालोसपा की चुनावी नाव डगमगाता देख कुशवाहा के वफादार सिपाही माधव आनन्द बेचैन हैं.

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सिटी पोस्ट लाइव : बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कई राजनितिक पार्टियां अपने फायदा अनुसार गठबंधन करने को लेकर अपना स्टैंड क्लियर नहीं कर पाई हैं. इन पार्टियों में से एक रालोसपा भी है.. रालोसपा की चुनावी नाव डगमगाता देख कुशवाहा के वफादार सिपाही माधव आनन्द बेचैन हैं. दो दिन पहले नीतीश नाम की माला जपने लगे थे. आज दोपहर में अपने नेता उपेंद्र कुशवाहा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बसपा और रालोसपा गठबंधन का गुण गा रहा थे. लेकिन रात के अंधेरे में मुंह छुपाते हुए अचानक उनकी नजर राबड़ी आवास के बाहर कैमरे से लड़ गयी. कैमरा देखते ही माधव आनन्द के भीतर चल रहे बेचैनी का पोल खुल गया.

बता दें कि सबसे पहले माधव आनद सिटी पोस्ट लाइव के कैमरे को देखकर मुंह छुपाने लगे और बाद में कहा कि तेजस्वी यादव से मेरे व्यक्तिगत संबंध है. इसलिए तेजस्वी यादव से मिलने आया हूं. मैं जब भी दिल्वली से पटना आता हूं, तो तेजस्वी यादव से मिलता हूं, ये बात उपेंद्र कुशवाहा को भी पता है. अगर आपको ये खबर दिखाना है तो दिखा दीजिए. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. हमने तेजस्वी यादव के साथ अंदर बात की है. साथ कॉफी भी पी है. गौरतलब है की कुशवाहा के तथाकथित वफादार सिपाही माधव आनन्द राजनीति के बेचैन आत्मा की तरह कभी नीतीश, कभी कुशवाहा तो अब तेजस्वी के जयकारा में लगे हैं. बता दें की आनन्द जी को 2019 में सांसद के टिकट मिलने का आनंद नहीं मिल पाया था. ऊपर से उपेंद्र कुशवाहा के करीबी ने गम्भीर आरोप भी लगाए थे. फिर बेचारे राज्यसभा जाने का स्वप्न देखने लगे. खैर स्वप्न देखना बुरी बात नहीं है. लेकिन बेचारे माधव आनंद का आनंद फिर बिखर गया.

इसके बाद विधान परिषद जाने के चक्कर में इन्होंने नया तराना छेड़ा. लेकिन वह ख्वाब भी ध्वस्त हो गया. अब छटपटाहट है विधायक बनने की. बेचारे करें तो क्या करें? अब भला सोचिए कि आज दिन के 2 बजे तक अपने नेता उपेंद्र कुशवाहा के वफादारी का गुण गाते हुए मौर्या होटल में संवाददाता सम्मेलन करते हैं. फिर फिर रात के अंधेरे में तेजस्वी यादव से मिलने राबड़ी आवास पहुंच जाते हैं. लेकिन कैमरे की नजर से बच नहीं पाए. फिलहाल इस चुनाव में सबसे ज्यादा राजनीति के बेचैन आत्मा के तौर पर माधवानंद ही दिख रहे हैं.

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