By, Shrikant Pratyush
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नालंदा की बेटी मिताली ने अमेरिका की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर तिरंगा लहराया

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नालंदा की बेटी मिताली ने  अमेरिका की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर तिरंगा लहरा कर एक विश्व कीर्तिमान स्थापित कर दिया है. ऐसी  कामयाबी हासिल करने वाली मितली को भारत की पहली महिला होने का गौरव  प्राप्त हो गया.

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नालंदा की बेटी मिताली ने अमेरिका की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर तिरंगा लहराया

सिटी पोस्ट लाइव : नालंदा की बेटी मिताली ने  अमेरिका की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर तिरंगा लहरा कर एक विश्व कीर्तिमान स्थापित कर दिया है. ऐसी  कामयाबी हासिल करने वाली मितली को भारत की पहली महिला होने का गौरव  प्राप्त हो गया. बगैर सरकारी मदद के मिताली ने  इतनी ऊंची मंजिल हासिल  कर ली है, जिसे पाने के लिए बड़े-बड़े के पसीने छूट जाते हैं. नालंदा जिले के कतरीसराय प्रखंड के मायापुर की रहने वाली मिताली ने सबसे पहले 2019 में दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी पर भी तिरंगा फहराया था, वहां जाने के लिए सात लाख रूपए की जरूरत थी लेकिन सरकारी मदद नहीं मिलने पर भी उसके परिवार वालों ने कर्ज लेकर इस मिशन तक उसे पहुंचाया. जिसके बाद 13  जनवरी 2020 को मिताली ने अमेरिका के शिखर पर भारत का झंडा फहरा दिया.

मिताली राज ने अमेरिका की ऊंची चोटी अकोकागुआ पर चढ़कर तिरंगा फहराकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। मिताली प्रसाद ने इसके पहले भी कंचनजंगा टाइगर हिल्स किलिमंजारो पर चढ़ाई कर सफलता हासिल कर चुकी है. इस सफलता  की सूचना मिलते ही मिताली  के परिवार में खुशी लहर दौड़ गई. पिता मनिंदर प्रसाद ने बताया कि यह  कारनामा जो उनकी बच्ची ने किया है वह किसी सरकारी मदद से नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण और कुछ कॉलेज के छात्र छात्राओं के द्वारा दिए गए डोनेशन के आधार पर वह अमेरिका जाकर अकोकागुआ चोटी पर चढ़कर फतह हासिल की है.  मिताली प्रसाद के परिजनों ने राज्य सरकार से लेकर स्थानीय प्रशासन तक अपनी बच्ची की सफलता के लिए आर्थिक मदद की गुहार लगा चुकी है. लेकिन उनके परिजनों के द्वारा दिए गए आवेदनों को कचरे के डब्बे में डाल दिया गया। बावजूद परिजनों का जज्बा कम नहीं हुआ.

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चाचा कवींद्र प्रसाद ने बताया कि मैं उन परिजनों को यह संदेश देना चाहता हूं जो बच्ची के पैदा होने पर नाखुश होते है लेकिन हमें गर्व है कि मेरे घर 8 बच्चीयों ने जन्म लिया है. और उसी में से एक मिताली है जिसपर आज पूरा भारत वर्ष गर्व कर रहा है. मिताली प्रसाद के पितामनिंदर प्रसाद एक छोटे से किसान हैं जो किसी तरह खेती कर मिताली प्रसाद को पढ़ा लिखा कर इस मुकाम तक पहुंचाया  है. मिताली राज अपने पूरे परिवार में 8 बेटियां और दो बेटे हैं जिसमें मिताली प्रसाद की अपनी कुल तीन बहने हैं मिताली की प्रारंभिक शिक्षा  कतरी सराय के मायापुर गांव में हुई है 2008 में प्रसाद की बेहतर पढ़ाई के लिए पटना में नामांकन करवाना पड़ा।  इस सफलता के लिए में आर्थिक सहयोग करने के लिए वाले जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव को परिवार वाले धन्यवाद रहे  है.

नालंदा से दीपक विश्वकर्मा की रिपोर्ट

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