By, Shrikant Pratyush
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रातभर खुले रहे मां छिन्नमस्तिका सहित सभी मंदिरों के पट, पड़ती रहीं हवन कुंडों में आहूतियां

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कार्तिक अमास्या को दीपावली मनाई जाती है और यह रात तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए भी खास है। झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ रजरप्पा के मां छिन्नमस्तिका मंदिर और दक्षिणेश्वर काली मंदिर में विधिवत काली पूजा के बाद रात भर शक्ति सिद्धि के लिए साधना की गई।

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रातभर खुले रहे मां छिन्नमस्तिका सहित सभी मंदिरों के पट, पड़ती रहीं हवन कुंडों में आहूतियां

सिटी पोस्ट लाइव, रांची : कार्तिक अमास्या को दीपावली मनाई जाती है और यह रात तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए भी खास है। झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ रजरप्पा के मां छिन्नमस्तिका मंदिर और दक्षिणेश्वर काली मंदिर में विधिवत काली पूजा के बाद रात भर शक्ति सिद्धि के लिए साधना की गई। इस अवसर पर रातभर मंदिरों के पट खुले रहे और पूजा-अर्चना होती रही। साधक और तांत्रिक सिद्धि साधना में लीन रहे। सिद्धपीठ मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर में 13 हवन कुंड हैं। कार्तिक अमावस्या की रात साधकों ने 13 हवन कुंडों में विशेष अनुष्ठान किये। सभी हवन कुंडों में ओम श्रीं ह्रीं क्लीं ऐ बैरोचिनिय हुं फट स्वाहा जैसे मंत्रों से आहूति डाली जा रही थी। घी-धूप, कपूर-जौ, चंदन और सुगंधित तेलों की खुशबू से पूरे मंदिर प्रक्षेत्र का वातारवरण भक्ति के आगोश में रहा। लाउडस्पीकरों से सकली तुमारी इक्षा, इक्षा माई तारा तुमी… तुमार कर्म तुमी करो मां, लोके बोले करी आमी …की गूंज रही।

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मान्यता है, दीपावली की रात खुद दीप प्रज्वलित करने आती हैं मां भगवती
मंदिर के पुजारी असीम पंडा बताते हैं, सिद्धपीठ में मान्यता है कि दीपावली की रात मां भगवती दीप प्रज्वलित करने खुद आती हैं और दीपक साथ पूरे मंदिर परिसर में भ्रमण करती हैं। कार्तिक अमावस्या का बहुत ही अधिक महत्व है। इसे दीपानीयता अमावस्या भी कहते हैं। यहां शक्ति की पूजा होती है, इसलिए तांत्रिक, साधक और उपासकों सहित सभी भक्तों के लिए इसदिन का विशेष महत्व है। खासकर रात्रिकालीन पूजा का। जो भी सच्चे मन से इस रात्रि को देवी मां काली की अराधना करता है, देवी उसके कार्यों को सिद्ध करती हैं। उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। तिथि में परिवर्तन के कारण मंगलवार की रात ही रजरप्पा के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में चंडी पूजा हुई। इसके साथ ही सप्तशति का पाठ भी हुआ। फिर 13 बकरों की बलि दी गई। दीपावली के अवसर पर मंदिर प्रक्षेत्र को आर्कषक ढंग से फूलों और लाल गुब्बारों से सजाया गया था। इसके साथ ही विद्युतसज्जा भी की गई थी। पुजारी दुर्गा दत्त पांडेय ने बताया कि दस महाविद्या में दक्षिणेश्वरी काली प्रथम रूप हैं। दीपावली की रात मां के दर्शन का खास महत्व है। इसी वजह से झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल सहित आसपास के राज्यों के लोग भी रजप्पा आते हैं। तंत्र सिद्धि के लिए साधू-संतों का भी जमावड़ा लगता है।

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रातभर चला अखंड भंडारा, पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद 
मंगलवारी पूजा समिति की ओर से मंदिर प्रक्षेत्र में भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारा समिति के जगदीश महतो ने बताया, यहां रात भर चले भंडारे में पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर अतुल पोद्दार, विनोद दांगी, रमेश महतो, प्रकाश कुमार, चंद्रदेव महतो सहित पूजा समिति के दर्जनों पदाधिकारी और सदस्य मौजूद थे।

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