By, Shrikant Pratyush
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संत पाॅल पब्लिक स्कूल के वार्षिकोत्सव महोत्सव में बच्चों ने दिया प्रतिभा का परिचय

विद्यालय एक मंदिर और शिक्षक एक शिल्पी : देवेन्द्र कुमार झा

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विद्यालय एक मंदिर है, जबकि शिक्षक एक शिल्पी। वह पत्थरों में भी जान फूंकने की क्षमता रखता है, शिक्षक हमारी संस्कृति के संरक्षक होते हैं, वे हमारे भविष्य का निर्माण करते हैं, बच्चों के निर्माण में शिक्षक की महती भूमिका होती है उपरोक्त बातें बेगूसराय के जिला शिक्षा अधीक्षक देवेन्द्र कुमार झा ने सोमवार को संत पाॅल पब्लिक स्कूल, तेघड़ा के 13वें वार्षिकोत्सव समारोह में कही.

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संत पाॅल पब्लिक स्कूल के वार्षिकोत्सव समारोह में बच्चों ने दिया प्रतिभा का परिचय

सिटी पोस्ट लाइव : विद्यालय एक मंदिर है, जबकि शिक्षक एक शिल्पी। वह पत्थरों में भी जान फूंकने की क्षमता रखता है, शिक्षक हमारी संस्कृति के संरक्षक होते हैं, वे हमारे भविष्य का निर्माण करते हैं, बच्चों के निर्माण में शिक्षक की महती भूमिका होती है उपरोक्त बातें बेगूसराय के जिला शिक्षा अधीक्षक देवेन्द्र कुमार झा ने सोमवार को संत पाॅल पब्लिक स्कूल, तेघड़ा के 13वें वार्षिकोत्सव समारोह में कही. सर्वप्रथम कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतीथि डीईओ बेगूसराय देवेन्द्र कुमार झा, पूर्व प्राचार्य डाॅ0 सच्चिदानन्द पाठक, साहित्यकार डाॅ0 शैलेन्द्र शर्मा त्यागी, शिक्षाविद् सच्चिदानन्द सिंह, पूर्व प्राध्यापक हितलाल पाठक, पूर्व आरक्षी उपाधीक्षक सुनील कुमार, पूर्व विधायक ललन कुॅवर, मशहूर सिने स्टार अमीय कश्यप, जिला भाजपा के अध्यक्ष सह शिक्षाविद्  राजकिशोर सिंह, संत पाॅल एजूकेशनल सोसायटी के सचिव रामबली सिंह, प्रख्यात न्यूरोलाॅजिस्ट डाॅ0 शंभू कुमार सिंह, विद्यालय के प्रबंधक सुनिल कुमार सिंह, विद्यालय की प्राचार्या श्रीमति दीपमाला सदहो़त्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। विशिष्ट अतिथी भाजपा के जिला अध्यक्ष सह शिक्षाविद् राजकिशोर सिंह ने कहा कि विद्यालय की नीव ज्ञानी पुरोधा द्वारा रखी जाती है, बच्चे ही किसी राष्ट्र के उन्नत भविष्य माने जाते हैं, अतः शिक्षकों को बच्चों के बेहतर भविष्य निर्माण में कभी कोई कसर नहीं रखनी चाहिए.

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शिक्षकों को बच्चों के प्रतिभा की पहचान कर उन्हें तरासने का दायित्व निभाना चाहिए. वहीं डाॅ0 सच्चिदानन्द पाठक ने कहा कि अभिभावकों को बच्चों पर अपने विचार नहीं थोपने चाहिए, उन्हें अपने कला के प्रदर्शन की छूट मिलनी चाहिए. हर बच्चों में कोई ने कोई विशेष प्रतिभा होती है कार्यक्रम के शुभारंभ में ही गणेश वन्दना प्रस्तुत कर बच्चों ने अपनी प्रतीभा का परिचय दिया. स्वागत गीत प्रस्तुत करती हुई बच्चीयों की टोली को देखकर अतीथि और अभिभावक प्रफूल्लित और चकित हो रहे थे तथा तालियों की बौछार कर रहे थे. सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान गुजराती नृत्य, राजस्थानी नृत्य, सुफी गान, शिव तांडव और पारम्परिक आदिवासी नृत्य आर्कषण का केन्द्र रहे. इन कार्यक्रमों में दर्शक झूमते रहे तथा उन्होंने प्रतिभागी बच्चों के प्रतिभा की सराहना की.

सांस्कृतिक कार्यक्रम में विद्यालय की छात्रा रश्मि, सुप्रिया वत्स, पूजा, सपना, गुड़िया, मयंक, अमुल्या, सुधांसु वत्स, दिव्यांसु वत्स, मुस्कान, प्राची सहित अन्य के कला प्रर्दशन की प्रशंसा की. वहीं नाटक कलिंग विजय, एवं मार्शल आर्ट के प्रदर्शन को भी लोगों ने सराहा जबकि फोल्क डांस पर उपस्थित लोग झूम उठे. अध्यक्षता विद्यालय के सचिव रामबली सिंह, स्वागत भाषण राम कुमार मिश्रा, मंच संचालन छात्र विवेक एवं फातिमा जैदी तथा धन्यवाद ज्ञापन हितलाल पाठक ने किया। वहीं वार्षिक प्रतिवेदन प्राचार्या दीपमाला सदहोत्रा ने किया. मौके पर शिक्षक डाॅ0 जीना टी0 सी0, राघवेन्द्र कुमार, संजीव कुमार सिंह, सरोज कुमार, राकेश चैधरी महंत, रामारमण, रंजीत कुमार ठाकुर, रंजन कुमार, प्रतीक लाल, प्रवीण कुमार, आर्को ज्योति, एस रामचन्द्रन, रामपूनित राय और कंचन कुमारी उपस्थित थे.

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