By, Shrikant Pratyush
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जनजातीय समाज के लोगों में सहचर जीवन व्यवस्था का महत्व है

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जनजातीय समाज के लोगों में सहचर जीवन व्यवस्था का महत्व है। यह इनके जीवन और दर्शन से जुड़ा हुआ है, इसलिए इससे हटकर कुछ सोचना वे पसंद नहीं करते।

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जनजातीय समाज के लोगों में सहचर जीवन व्यवस्था का महत्व है
 
सिटी पोस्ट लाइव, रांची: जनजातीय समाज के लोगों में सहचर जीवन व्यवस्था का महत्व है। यह इनके जीवन और दर्शन से जुड़ा हुआ है, इसलिए इससे हटकर कुछ सोचना वे पसंद नहीं करते। वर्ग और प्रजाति के आधार पर सभी अलग-अलग हैं, लेकिन कई अध्ययनों के आधार पर इस तरह की सहचर जैसी समानता सभी जगह के जनजातीय समाज में मिलती है। जनजातीय समुदाय की चारित्रिक विशेषता सभी जगह एक ही तरह की पायी जाती है, जिसे वह बदलना नहीं चाहते हैं। यह एक चक्र की तरह है। पुरानी चीजें नए रूप में पुन: प्रस्तुत होती है। डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान और कल्याण विभाग की ओर से रांची के आड्रे हाउस में आयोजित जनजातीय दर्शन पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फेंस का आज समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आदिवासी मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने ये बातें कहीं।
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इस अवसर पर उन्होंने आदि दर्शन स्मारिका का विमोचन भी किया। मुण्डा ने कहा कि पहली बार डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान द्वारा इसका आय़ोजन हुआ है, जिसमें आदिवासी दर्शन पर मंथन किया गया। इससे प्राप्त ऐतिहासिक तथ्यों पर अनुभव का लाभ समाज को मिलेगा। जनजातीय समाज पूरी प्रकृति को सहचर के रुप में देखता है और यह बहुत बड़ा दर्शन है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज प्रकृति का अनुचर नहीं है। इस समाज के लोग सरल स्वभाव के होते हैं। वे ज्यादा बोलते नहीं हैं। इसलिए कभी-कभी इसे उनकी कमजोरी समझी जाती है, जबकि वे प्रकृति के साथ एकांत में रहना ज्यादा पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातियों का जीवन ही उनका दर्शन है। उन्होंने आजतक कोई कानून नहीं बनाया है। उन्होंने जरुरी बातों को अपने जीवन का अंग बना लिया। जनजातीय समाज ने दस्तावेज बनाना जरुरी नहीं समझा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि जनजातीय समाज के लोगों के जीवन का आकलन किया जाए तो पता चलता है कि वे उत्पति के साथ जुड़े हुए हैं, इसलिए वे एकांत में रहना ज्यादा पसंद करते हैं।
10-15 फरवरी तक नेतरहाट में देशभर के जनजातीय लोक कलाकार जुटेंगेः हिमानी पांडे
कल्याण विभाग की सचिव हिमांडी पांडे ने कहा कि 10-15 फरवरी तक नेतरहाट में देशभर के जनजातीय लोक कलाकार जुटेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि झारखंड के कलाकार भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराएंगे। समापन समारोह में संस्थान के निदेशक रणेंद्र कुमार, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसएन मुंडा और सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्राध्यपक संतोष किड़ो के अलावा बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद थे।

 

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