By, Shrikant Pratyush
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पलामू में हर 3 साल में सूखा, 10 वर्ष में अकाल

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पलामू में हर तीसरे वर्ष सूखा और 10 वें वर्षा आकाल पड़ता है। सिंचाई व्यवस्था नहीं होने के कारण विगत 200वर्ष से यह सिलसिला चलता रहा है।

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पलामू में हर 3 साल में सूखा, 10 वर्ष में अकाल

सिटी पोस्ट लाइव, मेदनीनगर: पलामू में हर तीसरे वर्ष सूखा और 10 वें वर्षा आकाल पड़ता है। सिंचाई व्यवस्था नहीं होने के कारण विगत 200वर्ष से यह सिलसिला चलता रहा है। उत्तर कोयल जलाशय जैसी योजनाओं की शुरुआत इन समस्याओं का निदान ढूंढने के लिए ही की गई थी, परंतु राज्य सरकार की इच्छाशक्ति के अभाव में करीब साढे 5 अरब रुपये खर्च करने के बावजूद योजना अधूरी रह है । 1966 -67 के भीषण अकाल के बाद पलामू में शुरू की गई योजनाओं का क्रियान्वयन तेज होता गया, परंतु इसका परिणाम धरातल पर नहीं उतरा।1967 के बाद शुरू योजनाएं 75 प्रतिशत योजनाएं धरातल पर उतरती, तब 1992- 93 में पुनः अकाल नहीं पड़ता 1992- 1993 का आकाल 1966-67 से अधिक भयावह था । 1966-67 में जान माल का नुकसान नहीं हुआ था लेकिन 1992-93 में 100 से अधिक लोगों की जानें चली गई थी और पशुओं की व्यापक पैमाने पर क्षति हुई थी। 1992-93 के बाद रोजगार सृजन के लिए चेकडैम निर्माण की योजना शुरू की गई। जलछाजन योजना के तहत जिले में लगभग 500 से अधिक चेकडैम जा निर्माण किया गया। सभी चेकडैम की प्राक्कलित राशि 5 लाख रुपए से अधिक थी लेकिन इसमें एक लाख रुपए भी खर्च नहीं किये गए। ज़िला परिषद के स्थापना पूर्व डीआरडीए द्वारा भी चेकडैम निर्माण की प्रक्रिया लगातार 25 वर्ष की गयी। लगभग 25-25 लाख की लागत से विभिन्न क्षेत्रों में निर्माण किया गया। यह कार्य एनजीओ से ही कराया गया था। आज की तिथि में एक भी कारगर नहीं है। इस संबंध में डीआरडीए से आर टी आई द्वारा कई बार जानकारियां मांगी गई लेकिन हर बार यह लिख कर जवाब दिया जाता रहा कि उस समय के संबंधित अधिकारियों के जिम्मे वह योजना थी। यही मुख्य कारण है कि बरसात में किसी भी चेकडैम में पानी लबालब भरा नहीं रहता। यही नहीं अधिकांश चेकडैम नक्शे से ही लापता हो गए। इतना सब कुछ घटित होने के बावजूद सबक नहीं लिया जा सका है। आज भी अनुपयोगी तालाबों, बांधों आहारों आदि के निर्माण पर पैसा बहाया जा रहा है। इस परिस्थिति में अकाल से मुक्ति कैसे मिलेगी पलामूवासियों को यह प्रश्न खड़ा है ।

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