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नालंदा : कागज़ों पर बहती विकास की गंगा, कई वर्षों से सिर्फ आश्वासन, नहीं मिलती कोई सुविधा

  बाढ़ के समय घरों के छत एवं सरकारी स्कूलों में शरण लेने को मजबूर

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सिटी पोस्ट लाइव : बिहार सहित ज़िले में पिछले दिनों लगातार हुई बारिश से रहुई प्रखंड के मथुरापुर गांव के पहियारा खन्धे के पास पंचाने नदी का टूटे तटबंद के वजह से रहुई के आधा दर्जन गांवों के खन्धे में कमर भर से ज्यादा पानी हो गया है. रविवार की रात नदी का तटबंध करीब 100 फिट टूट गया है. पानी की तबाही का मंजर यह है कि बासक सैदी गांव में लगभग घरो में पानी घुस चुका है. कुछ लोग अपने घरों के छतों पर आशियाना बनाए हुए हैं.

वहीं, कुछ लोग बगल के स्कूल में तो कई लोग दूसरे घरों में शरण लिए हुए है. सैदी गांव निवासी भूषण मांझी, उपेन्द्र मांझी, बीरबल मांझी, राजो मांझी, सुधीर बिंद अन्य लोगों ने बताया कि घरों में पानी जमा होने की वजह से अनाज भिंग गया है. गांव के गलियों में पानी का मंजर यह कि छोटे छोटे बच्चे को घर में बांधकर रखने को मजबूर होना पड़ रहा है. रात की नींद गायब हो चुकी है, घर से निकलने के सभी रास्ते में पानी ही पानी है.

हर वर्ष घरों व गलियों में पानी नदी का तटबंध टूटने से फैल जाता है. अधिकारी हर साल की तरह आश्वासन देते है कि समस्याओं का स्थाई निदान कर दिया जाएगा है. लेकिन हर वर्ष हमलोग साल में चार महीने नरकीय जीवन गुजारने पर मजबूर होना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष प्रशासन की नाकामी का दंश सैदी गांव के लोगों को झेलना पड़ता है. इंद्र भगवान के आते ही अधिकारियों की टीम भी गांव में नजर देते है.

स्कूल या टेंट में ग्रामीणों चार दिन भोजन कराकर अपनी ड्यूटी निभाने के बाद फिर अगले साल नजर फिर बाढ़ आने पर ही आते है. मई फरीदा पंचायत के मुखिया अरुण कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन से प्रभावित लोगों को आने जाने के लिये नाव की व्यवस्था करनी चाहिए थी. समय रहते जिला प्रशासन के द्वारा अगर तटबंध की मरम्मत कार्य किया जाता तो ग्रामीणों को परेशानी नहीं झेलनी पड़ती है.

नालंदा से मो. महमूद आलम की रिपोर्ट

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